वार्डेन-अधीक्षक ने सौंपी हास्टल के दबंगों की सूची

Allahabad Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावास प्रशासन ने शुक्रवार को वैध और अवैध छात्र-छात्राओं की सूची डीएसडब्ल्यू कार्यालय में जमा कर दी। इसे छात्रावासाें में भी लगा दिया गया है। इसके अनुसार 40 फीसदी से अधिक कमरों में दबंगों का कब्जा है। वैध छात्रों में भी तकरीबन 50 फीसदी ने आखिरी दिन फीस जमा की। यही कारण रहा कि सूची फाइनल करने में कई छात्रावासों में रात हो गई। गौर करने वाली बात यह भी है कि महिला छात्रावास में भी बड़ी संख्या में अवैध कब्जा है तो ईश्वर शरण समेत कई हास्टल की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। सोमवार या मंगलवार को सूची इस मामले में गठित कमेटी के सामने रखी जाएगी। अवैध लोगों को 14 नवंबर तक कहीं और ठौर ढूंढने के लिए कहा गया है।
हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर के आदेश में एक महीने के अंदर छात्रावासों को अवैध लोगों से खाली कराने का आदेश दिया है। इसके बाद वर्षों से उदासीन पड़ा विश्वविद्यालय प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। इसी के तहत समय सीमा के आखिरी दिन शुक्रवार को सभी वार्डेन और अधीक्षकों ने डीएसडब्ल्यू कार्यालय में वैध और अवैध छात्र-छात्राओं की सूची उपलब्ध कराई। एसडी जैन, हिन्दू छात्रावास, मुस्लिम बोर्डिंग में स्थिति अधिक खराब है। पीआरओ प्रोफेसर पीके साहू ने बताया कि वरिष्ठ प्रोफेसर के नेतृत्व में बनी तीन सदस्यीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक में सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। साथ में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
वर्षों से अवैध तरीके से रह रहे लोग आगे भी ‘डमी’ छात्रों के सहारे कब्जा जमाए रखने की कवायद में जुटे हैं। केपीयूसी छात्रावास के छात्रों ने डीएसडब्ल्यू से मिलकर इसकी शिकायत की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जो सूची उपलब्ध कराई गई है उसमें आधे ऐसे ही छात्र हैं। यही स्थिति अन्य छात्रावासों में भी है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी इस बात को स्वीकार कर रहा है। यह उसकी सबसे बड़ी चिंता भी है लेकिन अफसरों का कहना है कि अभी कुछ नहीं किया जा सकता है। कहना है कि कोई भी छात्र नियमानुसार छात्रावास में प्रवेश पा सकता है। लगातार कार्रवाई से सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन्हें हास्टल एलाट हुआ है वे ही कमरे में रहें।
छात्रावासों में इन दिनों अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। अधिकतर छात्रावासों में कई ऐसे बुजुर्ग दबंग हैं जो अधीक्षक से भी वरिष्ठ हैं। पहले यह समस्या केवल जीएन झा और डायमंड जुबली छात्रावास में थी लेकिन नए परिवेश में अधिकतर हास्टल में यही हालत है। इस साल कई छात्रावास में नए लोगों को अधीक्षक बनाया गया है। इनके कई सीनियर उन्हीं के छात्रावासों में रह रहे हैं। ये लोग अब सीनियारिटी का रौब झाड़ रहे हैं। एक अधीक्षक के पास तो मोबाइल पर मैसेज भेजकर यह धमकी गई है कि ‘मैं तुम्हारा सीनियर हूं, मुझसे पूछकर ही सूची घोषित करना।’

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