त्योहार पर गैस के बिना बुझेगी रसोई

Allahabad Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। दशहरा बीतने के साथ ही घर-घर दीपावली की तैयारी शुरू हो गई है लेकिन रसोई गैस की किल्लत शहरियों के पसीने छुड़ा रही है। सर्वाधिक दिक्कत कनेक्शन न रखने वालों और एक ही पते पर कई कनेक्शन रखने वालों को हो रही है। परेशान लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। समस्या बढ़ने के साथ ही एजेंसियों पर मारामारी जैसे हालात हैं। आरोप हैं कि रसोई और परिवार की जांच के बाद भी लॉक कनेक्शन खुलने में सप्ताहभर से ज्यादा का समय लग रहा है।
तेल कंपनियों ने शहर में एक ही पते या नाम से जारी 35 हजार से ज्यादा कनेक्शन लॉक किए हैं। इसके कारण प्रभावित परिवारों को त्योहार के वक्त गैस मिलने में किल्लत हो रही है। कांग्रेस नेता आजाद परवेज का आरोप है कि करेली क्षेत्र में गैस एजेंसियों के कर्मचारी जांच के नाम पर उत्पीड़न कर रहे हैं। घर में घुसकर रसोई ताक रहे हैं। दिन में पुरुषों के न रहने से महिलाओं के लिए दिक्कत खड़ी हो रही है। ऐसे करीब 50 से ज्यादा परिवारों के घर रसोई गैस नहीं है। उन्हें ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ रही है। बकरीद में सैकड़ों परिवारों को बिना गैस के किसी तरह काम चलाना पड़ा। इससे दीपावली में भी दिक्कत आ सकती है।
10 फीसदी घटी रसोई गैस की मांग
गैस एजेंसी संचालकों का दावा है कि नई कीमतों के निर्धारण और सब्सिडी के सिलेंडर की संख्या सीमित करने का असर दिखने लगा है। कारों और दुकानों पर रसोई गैस के इस्तेमाल काफी कम हो गए हैं। अब किसी ग्राहक के नाम पर बुक गैस को ब्लैक करना हॉकर्स के लिए मुश्किल हो गया है। इसके कारण रसोई गैस की मांग में करीब 10 फीसदी की कमी आई है।
डेढ़ महीने में खत्म हुए सब्सिडी वाले सिलेंडर
14 सितंबर से सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित करने के आदेश लागू हुए हैं। बड़ी संख्या ऐसे ग्राहकों की है जो अभी सब्सिडी वाले सिलेंडर ही खरीद रहे हैं लेकिन ऐसे ग्राहकों की कमी भी नहीं है जिन्हें डेढ़ महीने में ही सब्सिडी के तीनों सिलेंडर इस्तेमाल कर लिए। रोजाना सभी एजेंसियों पर 20-30 ग्राहक ऐसे आने लगे हैं जो सब्सिडी सिलेंडर इस्तेमाल कर चुके हैं। एजेंसियों का दावा है कि नवंबर के अंत तक ऐसे ग्राहकों की संख्या 40 फीसदी तक पहुंच सकती है।
ग्राहकों और हॉकर्स ने निकाला जुगाड़
तेल कंपनियों की सख्ती का तोड़ ग्राहकों और हॉकर्स ने मिलकर निकाल लिया है। बताते हैं कि बिना कनेक्शन वाले ग्राहक मित्रों और रिश्तेदारों को सब्सिडी वाले सिलेंडरों के लिए फुल रेट यानी 950 रुपए भुगतान कर दिया। इससे ग्राहक नुकसान से बच रहे हैं और दोनों के काम भी चल रहे हैं। ऐसे ग्राहक भी हैं जो सब्सिडी वाले सिलेंडर का इस्तेमाल करने के बाद पड़ोसियों से 150-200 रुपए लेकर सिलेंडर बेच रहे हैं। हॉकर्स भी यही काम कर रहे हैं। वजह, पूरी कीमत देने वाले ग्राहकों के लिए महीने में सिलेंडरों की संख्या तय नहीं की गई है।
कामर्शियल सिलेंडरों की बिक्री दोगुनी बढ़ी
रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत 950 रुपए तक पहुंचने के बाद कामर्शियल सिलेंडरों की बिक्री बढ़ गई है। शहर की कई एजेंसियां हैं जो पहले 500 कामर्शियल सिलेंडर नहीं बेच पाते थे। उन एजेंसियों ने पिछले महीनेभर में 1000-1100 सिलेंडरों तक की बिक्री की। विजय गैस सर्विस से 1200 कामर्शियल सिलेंडर बिके हैं। आईओसी के अफसरों का कहना है कि अब दुकानों पर रसोई गैस का इस्तेमाल महंगा पड़ने लगा है। सो, रसोई गैस की कामर्शियल सिलेंडर में अदला-बदली लगभग बंद हो गई है।

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