कांशीराम नगर के विकास को अंतिम मोहलत

Allahabad Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। एटा जिले की कासगंज तहसील को काटकर कांशीराम जिला बनाए जाने के चार साल बाद भी उसका विकास न होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। प्रदेश सरकार को जिले के विकास का एक और मौका देते हुए कहा है कि यदि 31 मार्च 2014 तक विकास कार्य न हुआ जिले के गठन की अधिसूचना को स्वत: समाप्त माना जाएगा। न्यायालय ने अपेक्षा की है कि इस दौरान मूलभूत ढांचे के विकास संबंधी सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। हाईकोर्ट ने इसी के साथ सुनी जा रही जिला पंचायत अध्यक्ष एटा की याचिका को खारिज करते हुए चुनाव पर लगी रोक को भी समाप्त कर दिया है। जिला बार एसोसिएशन कासगंज की याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अमिताव लाला और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
कांशीराम जिले के गठन का याचिका में यह कहते हुए विरोध किया गया कि प्रदेश सरकार ने 17 अप्रैल 2008 को जिले के गठन की अधिसूचना जारी की। इसमें एटा की कासगंज और पटियाली तहसील को काटकर नया जिला बना दिया गया। जबकि जिला बनाने के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल पांच हजार वर्ग किलोमीटर, 12 थाने, तीन तहसीलें और दस ब्लाक होने चाहिए। जिले के गठन के चार साल बाद भी यहां मूलभूत ढांचे का विकास नहीं किया गया है। कलेक्ट्रेट, पुलिस मुख्यालय, राजस्व विभाग, लोकनिर्माण विभाग आदि के पास आज तक कोई कार्यालय नहीं है। डीएम, सीडीओ और एसपी नगरपालिका के भवन में बैठते हैं। सरकार ने जिले के गठन के समय बजट की कोई व्यवस्था नहीं की। सर्वोच्च न्यायालय के उत्तर प्रदेश बनाम चौधरी रणवीर सिंह केस और उच्च न्यायालय के राममिलन शुक्ला केस में दिए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि जिले के लिए वित्तीय प्रबंध नहीं किए जाते हैं तो नोटीफिकेशन रद किया जाना चाहिए। याचिका में जिले के गठन की अधिसूचना रद करने की मांग की गई।
प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया कि जिले के गठन के समय वर्ष 2008-09 के बजट में 263.30 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2008-09 के लिए 4.07 करोड़ रुपए जारी किए। यह रकम इसी बजट से दी गई। इसके लिए सरकार के कंटीजेंसी फंड का उपयोग नहीं किया गया। यह भी बताया कि जिला न्यायालय के लिए नया भवन बना दिया गया और यहां पद भी स्वीकृत करके उसमें न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियोें की तैनाती कर दी गई है। हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को सुनवाई के समय जिला जज कांशीराम नगर से विकास के संबंध में रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट से पता चला कि जिले में विकास का कोई कार्य नहीं किया गया। कुछ महत्वपूर्ण कार्यालयों के लिए भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है।
हाईकोर्ट ने इसी याचिका के साथ सुनवाई करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष एटा जोगिंदर यादव की याचिका को खारिज कर दिया है। जोगिंदर यादव वर्ष 2005 में जिला पंचायत के चुनाव में निर्वाचित हुए और पंचायत अध्यक्ष बने। उन्होंने 18 फरवरी 2006 को शपथ ली। 17 अप्रैल 2008 को नया जिला बनने के बाद उन्होंने याचिका दाखिल कर जिला पंचायत की स्थित में फेरबदल नहीं करने की मांग की थी। न्यायालय ने छह अगस्त 2010 को याचिका पर हाईकोर्ट ने यथा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया। यह आदेश अभी तक प्रभावी चला आ रहा था। याचिका खारिज होने के बाद यथा स्थिति का आदेश भी समाप्त हो गया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग से नियमानुसार कदम उठाने को कहा है।

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