खुले रोजगार के नए दरवाजे

Allahabad Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। पॉलीथिन के कारण दशकों से बेरोजगारी का दंश झेल रहे कपड़े, जूट और कागज के थैले बनाने वालों के खुशी के दिन लौट आए हैं। रिक्शा चलाकर और ट्रॉली खींचकर अपने परिवार का पेट पालने वाले घर में ही कुटीर उद्योग शुरू कर सकेंगे। बच्चों और परिवार के कारण बाहर नौकरी करने से वंचित घरेलू महिलाओं को भी पॉलीथिन पर प्रतिबंध का फायदा मिलेगा। वह भी चाहें तो अब घर बैठे एक छोटा सा उद्योग शुरू कर खुद को स्वावलंबी बना सकती हैं।
पॉलीथिन पर प्रतिबंध के सिर्फ यही फायदे नहीं हैं। प्रदूषण और स्वास्थ्य के दृष्टि से भी शहरियों को फायदा होगा। अल्लापुर में रहने वाली गृहणी कामिनी मिश्रा पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाए जाने से काफी खुश हैं। वह काफी समय पहले से खुद का रोजगार शुरू करना चाहती थीं। कुछ सूझ नहीं रहा था। रोजगार शुरू करने के लिए काफी पैसे की जरूरत पड़ती लेकिन अब किसी से मदद नहीं चाहिए। कामिनी का कहना है कि घर में ही जूट और कपड़े के थैले बनाकर दुकानों में सप्लाई करेंगी। तुलारामबाग निवासी पंकज श्रीवास्तव पॉलीथिन बैग बनाने की एक फैक्ट्री में काम करते थे लेकिन स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण उन्हें काम छोड़ना पड़ा। पंकज का मानना है कि पॉलीथिन की फैक्ट्री में ज्यादातर काम मशीनों से होते हैं, सो कम दो-तीन लोगों को ही काम पर रखकर अधिक से अधिक उत्पादन कर लिया जाता था। मशीन खरीदना भी हर व्यक्ति के वश की बात नहीं लेकिन अब तो कोई भी व्यक्ति घर बैठे मेहनत कर अपना उद्योग स्थापित कर सकता है।
पॉलीथिन पर प्रतिबंध से बड़ा फायदा यह भी होगा कि अब बारिश में नाला-नाली और सीवर लाइनें चोक होने की समस्याएं काफी कम हो जाएंगी। हर साल बारिश में जिन इलाकों में जल जमाव की समस्या होती है, उनमें से 80 फीसदी इलाकों में नाले, नालियों और सीवर लाइन में पॉलीथिन फंस जाने के कारण दिक्कत होती है। जब पॉलीथिन ही प्रतिबंधित कर दी गई तो तमाम इलाकों में यह समस्या का स्थायी रूप से समाधान हो जाएगा।
पशुपालकों को मिलेगी राहत
0 पॉलीथिन पर प्रतिबंध से बड़ी संख्या में पशुपालकों को लाभ होगा। गाय, भैंस पॉलीथिन को भी भोजन समझकर खा जाती हैं और धीरे-धीरे यह पॉलीथिन उनके पेट में इकट्ठा होती रहती है। अक्सर यह बड़ी पथरी का रूप ले लेती है और जानवर की मौत हो जाती है लेकिन अब पॉलीथिन का उपयोग खत्म हो जाने से पशुपालकों को बड़ी राहत मिलेगी।
00
पॉलीथिन के साथ बिकता है कैंसर
इलाहाबाद। वैसे तो पॉलीथिन का उपयोग सेहत के लिए कई तरह से हानिकारक है लेकिन इसे जब जलाया जाता है तो सेहत के लिए यह जानलेवा साबित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीथिन को जलाने पर पॉली एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन गैसें निकलती हैं, जिनमें कार्बन मोनो ऑक्साइड, फ्यूरॉन जैसी गैस भी शामिल हैं। इन गैसों से कैंसर की बीमारी होती है। ऐसे में तमाम सावधानियों के बावजूद लोग सिर्फ जली हुई पॉलीथिन के धुंए के कारण कैंसर की चपेट में आ जाते हैं। पॉलीथिन में गरम खाद्य सामग्री रखना भी खतरनाक है। अक्सर दफ्तरों में कर्मचारी पॉलीथिन में चाय मंगा लेते हैं। पॉलीथिन की ब्लीचिंग प्रॉपर्टी के कारण उस पर पर लगा मैटलिक कलर का पेंट गलकर चाय में मिल जाता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जन्म देता है। सिर्फ चाय नहीं, गरम अवस्था में कोई भी खाद्य सामग्री पॉलीथिन में रखे जाने के बाद सेहत के लिए खतरनाक बन जाती है।

Spotlight

Most Read

National

मौजूदा हवा सेहत के लिए सही है या नहीं, जान सकेंगे आप

दिल्ली के फिलहाल 50 ट्रैफिक सिग्नल पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) डिस्पले वाले एलईडी पैनल पर यह जानकारी प्रदर्शित किए जाने की कवायद हो रही है।

19 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाने के लिए उमड़े लाखों श्रद्धालु

मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु इलाहाबाद पहुंच चुके हैं। संगम तट पर चल रहे माघ मेले के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त किए हुए हैं।

16 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper