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गांधी की धरोहर को रेलवे ने ध्वस्त कराया

Allahabad Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धरोहर को भी उत्तर मध्य रेलवे के अफसर सहेज नहीं सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस धरोहर को सहेजने के बजाए रेलवे ने उसे ध्वस्त करा दिया। इलाहाबाद जंक्शन के सिविल लाइंस सरकुलेटिंग एरिया में गांधीजी की अस्थियों के संगम में प्रवाहित करने से जुड़ा शिलापट्ट पिछले तीन दिनों से गायब है। रेलवे के अफसरों को भी इसकी जानकारी नहीं है। सोमवार को यह मुद्दा उठने पर सक्रिय हुए अफसरों ने दावा किया कि कार्य पूरा होने के बाद संबंधित स्थल को और बेहतर बनाया जाएगा। फिलहाल, शिलापट्ट कहां है? यह बताने वाला कोई नहीं है।
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दरअसल, महाकुंभ के मद्देनजर रेलवे इलाहाबाद जंक्शन के सरकुलेटिंग एरिया का भी सुंदरीकरण करा रहा है। इसी योजना में सिविल लाइंस सरकुलेटिंग एरिया में स्थित पार्क को भी हटा दिया गया। इसी पार्क के एक हिस्से में गांधीजी से जुड़ा शिलापट्ट वर्षों पहले लगा था। रेलवे के ज्यादातर अफसर इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में जानते भी नहीं हैं। अफसर यह बताने तक की स्थिति में नहीं हैं कि शिलापट्ट कब लगा और किसने लगवाया? रेलवे के ठेकेदारों ने तीन दिन पहले शिलापट्ट को ध्वस्त कर दिया। मौके से शिलापट्ट हटा भी दिया गया है।
इसी स्थान पर रखा गया था अस्थि कलश
बताते हैं कि जिस स्थान पर शिलापट्ट लगाया गया था। स्पेशल ट्रेन से 11 फरवरी 1948 (रेलवे रिकार्ड के मुताबिक) को इलाहाबाद स्टेशन पहुंचने के बाद पहली बार इसी स्थान पर अस्थि कलश रखा गया। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसी स्थान से संबोधन किया। इसके बाद रेलवे ने ही शिलापट्ट लगाया। इसमें अस्थि कलश के इलाहाबाद आने की पूरी जानकारी भी दी गई थी।
रेलवे के अफसर हैं अनजान
इस ऐतिहासिक स्थान के महत्व से रेलवे के अफसर भी अनजान हैं। उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है कि राष्ट्रपिता गांधीजी के अस्थि कलश इसी स्थान पर रखे गए। वजह, वर्ष 2012 के शुरुआती दिनों में उत्तर मध्य रेलवे ने कॉफी टेबल बुक का प्रकाशन किया। इसमें रेलवे के विकास और उससे जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया गया है। अस्थि कलश लेकर दिल्ली से इलाहाबाद तक आई स्पेशल ट्रेन की जानकारी भी दी गई है लेकिन इस स्थान के बारे में इस पुस्तक में कोई जानकारी नहीं है। जबकि, इसे हेरिटेज से जुड़ी बताई गई है। रेलवे के अफसर भी इस भूल को मानते हैं।
‘सिविल लाइंस सरकुलेटिंग एरिया का सुंदरीकरण किया जा रहा है। शिलापट्ट हटाया गया है। कार्य पूरा होने के बाद शिलापट्ट को दुबारा लगा दिया जाएगा।’
संदीप माथुर
सीपीआरओ, एनसीआर
‘शिलापट्ट ध्वस्त करने की घटना से कोई आश्चर्य नहीं है। कुछ वर्ष पहले राष्ट्रपति जार्ज बुश के पहुंचने पर अमेरिका से उनके साथ आए कुछ विशेष खोजी कुत्ते गांधी की समाधि तक ले जाए गए। बदलते दौर में गांधी अप्रासंगिक हो गए हैं। सत्ताधारी नेताओं की तरह रेलवे के अफसरों ने गांधीजी को दरकिनार किया तो कोई अचरज नहीं है। उनसे गांधी से जुड़े स्मारक को सुरक्षित रखने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।’
डॉ कृष्ण स्वरूप आनंदी, गांधीवादी चिंतक
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