पहले ही झटके में बाहर हो जाएंगे 90 फीसदी छात्र

Allahabad Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। बैंकों के एक फैसले से लाखों प्रतियोगियों को बड़ा झटका लगा है। अफसर ग्रेड का फार्म भरने के लिए स्नातक में 60 फीसदी अंक अनिवार्य कर दिया गया है। इससे बीए, बीएससी, बीकॉम जैसी परंपरागत पढ़ाई करने वाले सामान्य परिवार के प्रतियोगियों के लिए अवसर सीमित हो गए हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो स्नातक में यहां के 10 फीसदी छात्र-छात्राएं भी प्रथम श्रेणी अंक प्राप्त नहीं कर पाते। कई बार तो यह आंकड़ा पांच फीसदी से भी नीचे रहा है। ऐसे में इस फैसले से इन्हें फार्म भरने से पहले ही बैंक की भर्तियों से बाहर होना पड़ेगा।
19 राष्ट्रीयकृत बैंकों में प्रोबेशनरी अफसर और मैनेजर ट्रेनी पदों पर भर्ती के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) लिखित परीक्षा कराता है, लेकिन साक्षात्कार बैंकों के स्तर पर अलग-अलग साक्षात्कार कराए जाते हैं। योग्यता भी अलग-अलग निर्धारित है लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब स्नातक में 60 प्रतिशत या इससे अधिक अंक पाने वाले ही आवेदन कर सकते हैं। साक्षात्कार भी आईबीपीएस ही कराएगा। इसको लेकर प्रतियोगियों में काफी नाराजगी और निराशा है। दो बार पीओ की लिखित परीक्षा पास कर चुके अभिनव तिवारी का कहना है कि इस फैसले से उनके जैसे प्रतियोगियों का एक झटके में सपना टूट गया है। प्रिया माथुर, शैलेश आदि का कहना है कि इन लोगों ने पिछले साल ही हजारों रुपए खर्च करके कोचिंग की लेकिन अब सब बेकार हो गया।
एक लाख अफसरों की होनी है भर्ती
बैंकिंग सेक्टर में आगामी चार वर्र्षों में छह लाख से अधिक भर्तियां होनी हैं। इनमें से तकरीबन एक लाख पद अफसर ग्रेड के हैं लेकिन इस फैसले से बैंकों में अफसर बनने का सपना पाले बैठे बड़े वर्ग को निराशा मिलेगी।
15 लाख से अधिक होते हैं शामिल
बैंकों की अफसर ग्रेड की भर्ती परीक्षा में हर साल 15 लाख से अधिक प्रतियोगी शामिल होते हैं। इनमें से दो तिहाई से अधिक युवाओंका स्नातक में 60 फीसदी से कम अंक होता है।
बीटेक, बीसीए वालों का होगा दबदबा
60 फीसदी अंक की अनिवार्यता से बैंकों की भर्ती परीक्षा में भी बीटेक, बीसीए आदि विषयों से स्नातकों का दबदबा होने की बात कही जा रही है। आमतौर पर इस तरह की प्रोफेशनल कोर्सेज की पढ़ाई करने वालों का स्नातक में 60 फीसदी या इससे अधिक होता ही है। इसके अलावा बैंक भर्ती की परीक्षा का पैटर्न भी इनके अनुरूप होता है। ऐसे में इस फैसले से बीटेक, बीसीए करने वालों के लिए अवसर बढ़ेंगे। बता दें कि आईएएस-पीसीएस में सीसैट लागू हो जाने से हिन्दी भाषी तथा परंपरागत विषयों से पढ़ाई करने वाले प्रतियोगियों के लिए पहले ही अवसर सीमित हो चुके हैं। काउंसलर पद्मा पांडेय का कहना है कि सामान्य परिवार के छात्र-छात्राओं के लिए यह बड़ा झटका है। बैंकिंग सेक्टर में इसे बडे़ बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। बैंक में विशेषज्ञ अफसरों की मांग बढ़ी है। इस फैसले को भी इसी रूप में देखा जा रहा है।
बढ़ेगा पलायन
नौकरी की शुरुआत में अच्छा वेतन नहीं होने के कारण बैकों से पलायन बढ़ा है। बेहतर अवसर मिलने पर युवा बैंक की नौकरी छोड़ दे रहे हैं जो प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में इस फैसले से चुनौती और बढ़ने की बात कही जा रही है। नई व्यवस्था से मेधावियों और प्रोफेशनल डिग्री वालों को नौकरी का अवसर मिलेगा, जिनके लिए और भी दरवाजे खुले हैं। ऐसे में पलायन की समस्या और बढ़ सकती है।

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