निजी कंपनी के कारण चौपट सफाई व्यवस्था

Allahabad Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। हर सड़क, रोड पटरी और गलियां कूड़े से पटी पड़ी हैं। नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठ पा रहा है। गंदगी के कारण सड़क पर चलना मुहाल है और इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं कूड़ा उठाने के कार्य में लगी कंपनियां। जेएनएनयूआरएम के तहत नगर निगम ने इन कंपनियों को शहर में कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी दी। कंपनियों ने साझे में काम शुरू किया। इसके लिए करोड़ों की लागत से नैनी के बसवार में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने का काम शुरू हुआ लेकिन पूरा अब तक नहीं हुआ। इस वजह से शहर का पूरा कूड़ा वहां नहीं जा पा रहा है।
महाकुंभ मेला में अब ढाई माह का समय है लेकिन शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। मनमोहन पार्क, इंडियन प्रेस चौराहा, करबला चौराहा, राजर्षि टंडन मंडपम, कारपेंट्री चौराहा, करेलाबाग, हसन मंजिल-अटाला, शाहगंज थाने के पास, अतरसुइया गोलपार्क, लूकरगंज, अल्लापुर, दारागंज आदि इलाकों में डंपिंग ग्राउंड बने हैं। नगर निगम के सफाई कर्मचारी गली, मोहल्लों में सफाई कर कूड़ा निकालकर वहां गिराते हैं। एडब्ल्यूपी और एसपीएमएल की जिम्मेदारी डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा उठाकर बसवार स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ले जाना हैं, जहां उससे खाद और ईक्रो ब्रिक (टाइल्स) बनाई जानी है। कूड़ा उठाने के लिए कंपनी के पास जेसीबी, डंपर, बड़ी-छोटी कूड़ा गाड़ियों की पूरी फौज है। नगर निगम ने अपनी गाड़ियां भी कंपनी को दी हैं। बावजूद इसके डंपिंग ग्राउंडों पर कूड़े का ढेर लगा रहता है। शहर की बदहाली के लिए जिम्मेदारी कंपनी के खिलाफ नगर निगम ने आज तक कोई कार्रवाई भी नहीं की।
पिछले वर्ष सितंबर में पूरा होना था प्लांट
इलाहाबाद। बसवार स्थिति सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पिछले वर्ष सितंबर में ही पूरा हो जाना था। 30.49 करोड़ की लागत वाले इस प्लाट में कूड़े के छंटाई के लिए मशीनें लगाई गई हैं। इसमें से प्लास्टिक को अलग करने वाली मशीनों ने तो काम शुरू कर दिया है लेकिन सिल्ट और मलबे से टाइल्स बनाने वाली मशीन अब तक नहीं शुरू हुई है। शहर में प्रतिदिन निकलने वाले तकरीबन 600 मीट्रिक टन में से प्लांट में अभी 350-400 मीट्रिक टन ही कूड़ा पहुंच रहा है।
करेलाबाग में फेंका जा रही मलबा, सिल्ट
इलाहाबाद। नाले-नालियों से निकलने वाला सिल्ट तथा घरों से निकलने वाले मलबे का निस्तारण प्लांट में अब तक न शुरू होने के कारण उसे करेलाबाग में फेंका जा रहा है। यहां के निचले इलाकों को सिल्ट और मलबे से पाटा जा रहा है, जबकि पिछले वर्ष सितंबर के बाद से ही इसे प्लांट में भेजे जाने का काम शुरू हो जाना चाहिए था।
कैसे खत्म होंगे सड़क किनारे बने डंपिंग ग्राउंड
इलाहाबाद। नगर निगम की योजना शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क किनारे बने डंपिंग ग्राउंड को खत्म करने की है। नगर आयुक्त राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही इसका संकेत भी दे दिया था लेकिन बसवार प्लांट अब तक पूरी क्षमता से न शुरू होने के कारण इसमें दिक्कत आ रही है। इसके पहले कानपुर में नगर आयुक्त रहे श्री सिंह ने वहां सड़कों के किनारे बने डंपिंग ग्राउंड को खत्म करा दिया था और उसी की तर्ज पर यहां भी काम कराने की योजना है।
‘बसवार स्थित प्लांट में कूड़े को अलग कर खाद बनाने का काम शुरू हो गया है। सिल्ट और मलबा अलग करने वाली मशीनें अभी नहीं लग सकी हैं। सरकार से स्वीकृत धनराशि न मिलने के कारण दिक्कत आ रही है लेकिन अगले एक-डेढ़ माह में प्लांट पूरी क्षमता से काम करने लगेगा।’
संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता, नगर निगम

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