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छोटा बच्चा समझ के न थमाना नकली नोट

Allahabad Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। दस-बारह की उम्र वाले बच्चों को छोटा समझ अगर किसी दुकानदार ने नकली नोट थमा दी तो उसकी शामत है। आने वाले कुछ महीनों में इन्हें बहलाना आसान न होगा। केवल असली नकली नोट ही नहीं, उन्हें पाई पाई का हिसाब पता होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इनको हिसाब किताब में मास्टर बनाने में जुटा है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया। आरबीआई के विशेषज्ञ शुक्रवार को इलाहाबाद में थे। विज्ञान परिषद में उन्होंने बच्चों को न केवल हिसाब किताब समझाया बल्कि बैकिंग लोकपाल, खाता खोलने से लेकर तमाम तकनीकी जानकारियां दीं।
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स्कूली बच्चों का खाता न खोलने वाले बैंक अफसरों को भी अब चेत जाना चाहिए। अब उनके लिए बच्चों को फुसलाना पहले जैसा आसान नहीं होगा। उनके सवालों का जवाब भी देना होगा। आरबीआई की टीम ने जिस तरह बच्चों को खेल-खेल में असली-नकली नोट की पहचान और बैंकिंग अधिकारों के प्रति जागरूक किया, उससे उनमें रुचि जगी। क्विज मास्टर रियान शाह की लुभाने वाली शैली ने बच्चों के लिए इसे समझना और आसान कर दिया था।

नकली नोट से मुक्ति तथा सभी का बैंक में खाता खुलवाना आरबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। वह भी तब जब बैंक के अफसर ही बच्चों तथा ग्रामीणों का जीरो बैलेंस पर खाता खोलने से मना कर दे रहे हैं। इसकी वजह से लाखों छात्र-छात्राओं को समय से छात्रवृत्ति नहीं मिल पाती। ऐसे में आरबीआई की ओर से बच्चों को उनके बैंकिंग अधिकार, बैंकिंग लोकपाल, खाता खोलना आदि के बारे में जानकारी देने के लिए अभियान चलाया गया है। इसी के तहत अखिल भारतीय अंतर स्कूल क्विज-2012 का आयोजन किया गया। इसी सिलसिले में आरबीआई के केंद्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक बाजिल शेख, क्षेत्रीय निदेशक केआर दास की मौजूदगी में विज्ञान परिषद में प्रतियोगिता आयोजित की गई।
पहले चरण में सामान्य ज्ञान तथा वित्तीय प्रबंधन से संबंधित सवालों पर आधारित टेस्ट लिया गया। इसमें सफल छह टीमों, बीबीएस इंटर कालेज, ब्वायज हाईस्कूल, एमएल कान्वेंट, संस्कार इंटरनेशनल स्कूल, एयरफोर्स स्कूल बमरौली और केपी गर्ल्स इंटर कालेज ने क्विज के मुख्य चरण में हिस्सा लिया। सात चरणों की प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं को असली-नकली नोट की पहचान, बैंक, वित्तीय लेन-देन से संबंधित सवाल पूछे गए। इतना ही नहीं इस बहाने विद्यार्थियों को विदेशी करेंसी के बारे में भी बताया गया। प्रतियोगिता में ब्वॉयज हाई स्कूल के अतुलेश झा और अमन श्रीवास्तव की टीम प्रथम रही, जिसे नवंबर में आयोजित आंचलिक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। दूसरे स्थान पर एयरफोर्स की टीम रही। प्रतियोगिता में मौजूद 70 स्कूलों के बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों को बैंकिंग जानकारी से संबंधित पुस्तक भी प्रदान की गई।
खाता न खोले जाने तथा विभिन्न योजनाओं में धांधली की शिकायत गांवों में अधिक है। इसके तहत आरबीआई की तरफ से गांवों में भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत ग्रामीणों को खाता खोलने से लेकर बैंक की अन्य सभी योजनाओं तथा बैंकिंग लोकपाल के बारे में जानकारी दी जाएगी। आरबीआई केंद्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक बाजिल शेख ने बताया कि हर परिवार को खाता खुलवाना अब भी बड़ा लक्ष्य है। वित्तीय समावेशन योजना के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों के लिए पूरे देश में क्विज हो रहा है। फाइनल राउंड की प्रतियोगिता दिसंबर में मुंबई में होगी। पुरस्कार वितरण समारोह में आरबीआई के गवर्नर स्वयं मौजूद रहेंगे।
मल्टीनेशनल कंपनी में प्रबंधक, सीए या टेकभनोक्रेट्स बनकर पैसा कमाना या फिर आईएएस-पीसीएस जैसे प्रतिष्ठित पद की लालसा! युवाओं के बड़े वर्ग का यही लक्ष्य है। ऐसे में किसी का, वह भी किसी छात्रा का सीएम बनने का सपना आश्चर्य में डालता है। राजनीति को लेकर बदलाव की यह बयार आरबीआई की ओर से आयोजित क्विज में दिखाई दी। मुख्य राउंड की प्रतियोगिता में शामिल केपी गर्ल्स इंटर कालेज की छात्रा राजश्री ने सबके सामने कहा कि वह सीएम बनना चाहती है तो सब हैरान हो उसे देखने लगे।

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