पगडंडियों से निकली सफलता की राह

Allahabad Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। सपना देखने तथा उसे पूरा करने की इबारत केवल महानगर की ऊंची इमारतों में नहीं लिखी जाती। खेत-खलिहान से निकली पगडंडियों से भी सफलता की राह निकलती है। जिजीविषा और जिद के पक्के पीसीएस-2010 के प्रतियोगियों ने कुछ ऐसी ही टेढ़ी मेढ़ी राह पर चलकर सफलता की कहानी लिखी है। परिणाम में पहले दस स्थान पर रहने वालों को ही देखें तो इनमें पांच मेधावियों की बारहवीं या स्नातक की पढ़ाई गांवों या छोटे शहरों के स्कूल-कालेजों में हुई। खास यह कि जहां अंग्रेजी सफलता का मानक बन गया हो, वहां इन प्रतियोगियों ने हिन्दी माध्यम से प्रदेश की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में झंडा बुलंद किया है। इससे ग्रामीण और हिन्दी भाषी प्रतियोगियों में काफी उम्मीद जगी है।
इस परीक्षा में तीसरे स्थान पर रहे सुशील प्रताप सिंह ने आजमगढ़ में मुबारकपुर से इंटर तक पढ़ाई की है। सुशील इससे पहले भी लगातार तीन बार पीसीएस में सफल हो चुके हैं लेकिन मनचाहा पद न मिलने के कारण ज्चाइन नहीं किया। चौथे स्थान पर रहे पंकज कुमार वर्मा ने तो खेती-किसानी के बीच अफसर बनने का सपना देखा और पूरा किया। लखीमपुर के पंचदेवरा गांव के पंकज के पिता, भाई और पूरा परिवार खेती करता है। सातवें स्थान पर रहे किसान के बेटे संजय पांडेय ने बलिया से स्नातक की पढ़ाई की। खास यह कि मुख्य परीक्षा में विधि विषय लेने के बावजूद इन्होंने हिन्दी माध्यम को अपनाया। एसडीएम चुनी गईं नीता यादव की भी बारहवीं तक की पढ़ाई आजमगढ़ से हुई है। हालांकि स्नातक की पढ़ाई के लिए वह लखनऊ चली गई लेकिन परीक्षा का माध्यम हिन्दी ही रहा। नीता बताती हैं, दादा छोटे यादव ने हमेशा प्रेरित किया। वह सपना पूरा हुआ लेकिन दुर्भाग्य है कि आज वह नहीं हैं। एसडीएम पद पर ही चयनित कुंडा-प्रतापगढ़ के रजनीश कुमार मिश्रा ने लालगंज से इंटरमीडिएट तथा भवानीगंज से स्नातक की पढ़ाई की। डिप्टी एसपी पद पर चयनित संतोष मिश्रा ने जौनपुर के सिरसी से इंटरमीडिएट तथा सिवानगंज से बीए किया।
पीसीएस-2009 में भी मिली थी सफलता
पीसीएस-2009 में भी बड़ी संख्या में हिन्दी भाषी और ग्रामीण परिवेश के प्रतियोगी सफल हुए थे। हालांकि टॉपर्स की सूची में अपेक्षाकृत शहरी प्रतियोगियों की भागीदारी अधिक रही। गोरखपुर के राकेश कुमार सिंह टॉपर रहे तो लखनऊ के विश्वभूषण मिश्रा को तीसरा स्थान मिला। लड़कियों में टॉपर अर्चना द्विवेदी इलाहाबाद में ही रहीं लेकिन चौथे स्थान पर रहे अजय तिवारी की स्नातक की पढ़ाई आजमगढ़ के लालगंज में हुई थी। एसडीएम के लिए चयनित अजीत कुमार सिंह की इंटरमीडिएट की पढ़ाई भी गांव के स्कूल में हुई। अटल राज भास्कर, प्रीति ने भी गांव के स्कूलों में ही पढ़ाई के दौरान अफसर बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए इलाहाबाद चलीं आई।
‘गांवों में सपने तो देखे जाते हैं लेकिन सुविधाएं नहीं होने के कारण उसे पूरा करना कठिन होता है। देश में समान एजुकेशन नहीं है लेकिन समान एग्जामिनेशन है। इसमें गांव की मेधा पिछड़ जाती है। शुरू से ही ध्यान दिया जाए तो और बेहतर रिजल्ट होगा।’
संजय पांडेय
पीसीएस-2010 में सातवीं रैंक
‘पीसीएस में तो ग्रामीण पृष्ठभूमि के कुछ प्रतियोगी सफल हो जाते हैं लेकिन आईएएस में उनके लिए अवसर सीमित हो जाते हैं। बदलाव का जो दौर शुरू हुआ है इसमें उनके लिए और ज्यादा सुविधाएं देने की जरूरत है।’
रनीश जैन
काउंसलर

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