गिट्टी के पहाड़ में सोना तलाश रहे वैज्ञानिक

Allahabad Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। वैज्ञानिक जिस रिपोर्ट और योजना पर काम कर रहे हैं, उसी के अनुरूप सब चलता रहा तो संभव है गिट्टी और सिलिका सैंड देने वाले यमुनापार के पहाड़ सोना, चांदी उगलें। यह कोरा अनुमान नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों की टीम इन दिनों इसी संभावना पर काम कर रही है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के साथ कई विभागों के वैज्ञानिकों की टीम पिछले तीन दिनों से बारा, शंकरगढ़, जसरा, जारी, नारीबारी के पठारों में विशिष्ट धातुओं की खोज में जुटी है। हालांकि वैज्ञानिकों ने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया लेकिन उनके साथ चल रही टेक्निकल टीम के कुछ सदस्यों ने स्वीकार किया कि प्राथमिक स्तर पर पठार में सोना, चांदी तथा कार्बन के अवयवों की संभावना मिली है।
टेक्निकल टीम के सदस्यों पर यकीन करें तो वैज्ञानिकों ने जांच का आधार 1941 की एक रिपोर्ट को बनाया है। अंग्रेजों ने इस क्षेत्र में सर्वे कराया था और उन्होंने कई जगहों पर निशान लगाए थे जहां विशिष्ट धातुओं की तलाश की जानी थी। रिपोर्ट के बिन्दुओं के आधार पर क्षेत्र में पहले भी कई बार पड़ताल कराई गई और सकारात्मक संकेत मिलने के बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया समेत कई विभागों ने कुछ चिन्हित जगहों पर खोदाई शुरू करा दी है।
कई जगह बने हैं जीटीएस प्वाइंट
क्षेत्र में पहले से कई जीटीएस प्वाइंट बने हैं। टेक्निकल टीम के सदस्यों ने बताया कि अंग्रेजों के समय में सर्वे के बाद 1972 में भी सर्वे कराया गया था। दोनों दफे के प्वाइंट बने हुए हैं। अब उनमें से ज्यादातर प्वाइंट बीहड़ों में तब्दील हो गए हैं। सभी चिह्नित स्थलों की तलाश कर वहां मशीन से होल किया जा रहा और नंबर डाले जा रहे हैं। होल इस तरह का है कि मिट्टी से भरने के बाद भी मिटेगा नहीं। वैज्ञानिकों ने पुराने जीटीएस प्वाइंट तलाश कर ही आगे का काम शुरू किया है।
टोंस और यमुना किनारे भी हो रही खोज
खनिज संपदा की तलाश केवल पठारों में ही नहीं हो रही है। वैज्ञानिकों ने टोंस नदी और यमुना के किनारे के कई गांवों और खदानों में भी निशान लगाया है। बताया गया कि वहां बालू खनन और पठारों में पत्थर तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग के कारण धरती के भीतर होने वाले बदलाव का पता लगाया जाएगा। वैज्ञानिकों के पास जो उपकरण हैं, उनसे जमीन के भीतर चट्टानों के खिसकने का भी पता चलेगा। माइनिंग के कारण क्षेत्र में क्या बदलाव आया, भूकम्प के मद्देनजर यह क्षेत्र कितना संवेदनशील है, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
जनवरी तक चलेगा सर्वे
यमुनापार के विभिन्न हिस्सों में वैज्ञानिकों की पांच सदस्यीय टीम पड़ताल में जुटी है जिसमें एक महिला वैज्ञानिक भी है। मशीन और कम्प्यूटर पर काम के लिए सात अन्य सहयोगी हैं। सहयोगियों के मुताबिक क्षेत्र में सर्वे जनवरी 2013 तक चलेगा। वैज्ञानिक जारी के चौधरी चरण सिंह नहर बंगले में टिके हैं। वहां पानी, बिजली का संकट था। टेक्निकल टीम की शिकायत पर सोमवार को एसडीएम बारा राममूर्ति मिश्रा ने वैज्ञानिकों से मिल समस्याएं जानीं। एसडीएम ने यह तो स्वीकार किया कि वैज्ञानिक विशेष खनिज संपदा की संभावना का पता लगा रहे हैं लेकिन यह भी साफ किया कि इस बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है।

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