संगम के ठंठीमल ने शुरू की थी डाक सेवा

Allahabad Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। क्या आपको पता है कि देश में डाक सेवा का आगाज कब और कहां से हुआ? जिन्हें पता है, वे तो हैरान हैं ही, जिन्हें नहीं पता, उनके चौंकने का मौका है। यह जानकर हैरानी होगी कि देश में ‘चिट्ठी युग’ की शुरुआत संगम नगरी से हुई थी। यहां के व्यापारी लाला ठंठीमल ने डाक विभाग के गठन से 13 साल पहले 1841 में ही डाक सेवा की शुरुआत कर दी थी। उन्होंने 1850 में ‘इन लैंड ट्रांजिट कंपनी’ नामक कंपनी भी बना ली थी जिसे देश में डाक व्यवस्था की पहली कंपनी होने का श्रेय प्राप्त है। इस कंपनी को अंग्रेजों ने भी मान्यता दी और उसे 1854 में गठित एकीकृत विभाग में मर्ज कर लिया गया।
ठंठीमल ने इलाहाबाद से कानपुर के बीच घोड़ा गाड़ी से डाक सेवा शुरू की। जीटी रोड बनने के बाद सात किलोमीटर की दूरी घोड़ा गाड़ी तथा पालकी से होती थी। इसके बाद बिठूर तक डाक नाव से पहुंचाई जाती थी। उन दिनों हरकारों को जंगल का रास्ता भी तय करना पड़ता था। इसलिए सुरक्षा के लिहजा से वे कमर में घंटी बांधकर और भाला लेकर भी चलते थे। आधा तोला वजन की डाक का किराया एक पैसा लगता था। 1850 में ठंठीमल में कुछ अंग्रेजों के साथ मिलकर ‘इनलैंड ट्रांजिट कंपनी’ की स्थापना की। इसी के साथ सेवा का विस्तार कोलकाता, मेरठ, दिल्ली, आगरा, लखनऊ, बनारस आदि प्रमुख शहरों में भी किया गया। डाक निदेशक केके यादव ने बताया कि छह मई 1840 को ब्रिटेन में पहली डाक टिकट जारी हुई थी। इसके एक साल बाद ठंठीमल ने भारत में यह सेवा शुरू हुई थी। अब उनके परिवार के लोग कानपुर में रहते हैं।
एयर मेल सर्विस की शुरुआत भी यहीं से
पूरे विश्व में एयर मेल सर्विस की शुरुआत भी इलाहाबाद से हुई थी। 18 फरवरी 1911 को पहली बार हेलीकाप्टर से संगम क्षेत्र से नैनी (अब सेंट्रल जेल) तक मेल पहुंचाई गई थी। विभाग ने पिछले साल ही इसका शताब्दी वर्ष मनाया। संयोग से उस साल भी कुंभ लगा था और एक लाख से अधिक लोगों ने उस ऐतिहासिक उड़ान को देखा था। इतना ही नहीं देश में रेल डाक सेवा की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। पहली बार एक मई 1864 को रेलवे शार्र्टिंग सेक्शन की स्थापना हुई थी, जो बाद में रेलवे डाक सेवा में तब्दील हो गया।
..पर ठंठीमल पर जारी नहीं हो सका टिकट
इलाहाबाद। देश में डाक सेवा की शुरुआत करने वाले लाला ठंठीमल पर भी डाक विभाग टिकट जारी करने से पीछे हटता रहा है। इसके लिए ठंठीमल के परिवार के सदस्य विनोद टंडन लगातार प्रयास करते रहे। इसमें इलाहाबाद के एक व्यापारी ने भी काफी मदद की। इन लोगों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अफसरों से मुलाकात की। इन लोगों ने कानपुर के फिलैटलिक ब्यूरो से उपलब्ध संबंधित डाक्यूमेंट भी दिए लेकिन अभी उन पर डाक टिकट जारी नहीं हो सका है।

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