पांच अरब की सड़कों ने दी पांच मुसीबतें

Allahabad Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। शहर भर की सड़कें पांच अरब की लागत से बनाई जा रही हैं लेकिन इन सड़कों ने राहत देने के बजाय शहरियों को पांच बड़ी मुसीबतों में फंसा दिया है। सड़कों के कारण दुर्घटना, जाम, बीमारी, जैसी समस्या से शहरी महीनों से जूझ रहे हैं। वाहनों भी खराब हो रहे हैं तो लोगों को दफ्तर, स्कूल, कॉलेज पहुंचने में भी देर हो रही है लेकिन अफसरों को इन समस्याओं से क्या लेना-देना। कहीं जाम में फंसे भी हो साथ चल रहा एस्कार्ट उनके वाहन के लिए रास्ता खुलवा देगा। वाहन खराब हुई तो सरकारी खजाने से उसकी मरम्मत का भी प्रावधान है। अफसरों को लग्जरी गाड़ियों में भले ही झटके न लगें लेकिन दोपहिया वाहन पर चलने वाला आम आदमी कमर दर्द जैसी बीमारियों से जूझ रहा है। अफसरों को तो हाजिरी चेक करनी है, उनके हाजिरी लेने वाला कोई नहीं लेकिन जाम के कारण जो कर्मचारी दफ्तर देर से पहुंच रहे हैं। ऐसे में देन होने के कारण उनके वेतन से कटौती या अन्य विभागीय कार्रवाई के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है।
जर्जर सड़कों से मुसीबत
बढ़ीं दुर्घटनाएं
शहर की ज्यादातर सड़कों पर महीनों से गिट्टी और मिट्टी बिछाकर छोड़ दी गई है। दो दिनों पहले जॉर्जटाउन के मदन मोहन मालवीय मार्ग पर दसवीं की एक छात्रा की सड़क पर बिखरी हुई गिट्टियों पर गिरने से मौत हो गई। ऊंची-नीची सड़कों पर फिसलकर घायल होने की घटनाएं तो आम बात हो गई है। सोमवार दोपहर जवाहर लाल नेहरू रोड पर नगर निगम के ठेकेदार सुनील राय पर्वती हॉस्पिटल के ठीक सामने अपने दोपहिया वाहन से गिरकर घायल हो गए। वहां भी सड़क चौड़ीकरण के लिए एक किनारे पर गिट्टी और मिट्टी बिछाकर छोड़ दी गई है, जिसकी वजह से दोपहिया वाहन चालक आए दिन गिरकर घायल हो रहे हैं।
कबाड़ हुए वाहन
जर्जर सड़कों पर चलते-चलते वाहन भी कबाड़ बन गए हैं। सर्विस सेंटर में पहुंच रहे ज्यादातर चार पहिया वाहनों में शिकायत आ रही है कि किसी का टायर घिस गया है तो किसी का ड्राई सॉफ्ट खराब हो गया है। साधारण चार पहिया वाहनों की सर्विसिंग में पहले ढाई से तीन हजार रुपए खर्च आता था तो अब लोगों को आठ से दस हजार रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। ऊबड़-खाबड़ सड़कों के कारण दोपहिया वाहनों की सर्विसिंग के लिए भी लोगों को पहले के मुकाबले दोगुना खर्च करना पड़ रहा है।
जगह-जगह जाम
ऊबड़-खाबड़ सड़कों के कारण शहरियों को रोज जाम की जबर्दस्त समस्या से जूझना पड़ रहा है। जवाहर लाल नेहरू रोड पर दोनों तरफ सड़क का कुछ हिस्सा बनाकर छोड़ दिया गया है और किनारे पर गिट्टी-मिट्टी बिखरी पड़ी हुई है। ऐसे में सड़क पर चलने की जगह पहले के मुकाबले आधी रह गई है। सुबह हाईकोर्ट, एजी ऑफिस, गवर्नमेंट प्रेस, नगर निगम, प्रधान डाकघर आने वाले वकील, कर्मचारी सहित तमाम लोग इसी रोड से अपने-अपने कार्यालय जाते हैं और शाम को इसी रोड से घर लौटते हैं। एक साथ ट्रैफिक बढ़ने पर इस रोड पर छह माह से जाम की समस्या बनी हुई है। यही हालत सीएमपी डॉट पुल के नीचे वाली सड़क का भी हाल है। वहां तो कुछ दिनों पहले डीएम ही आंधे घंटे तक जाम में फंस रहे।
बीमारी ने पसारे पांव
ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर दोपहिया वाहन चलाकर लोग बीमार रहे हैं। अस्पतालों में कमर दर्द के रोगियों की संख्या में आम दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है। सड़कों पर मिट्टी और गिट्टी बिछाकर छोड़ दी गई है। हवा में उड़ रही मिट्टी फेफड़ों को खोखला बना रही है। नतीजा कि दमा के रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।
बिगड़ा बजट
टूटी-फूटी सड़कों ने आम आदमी के बजट को भी प्रभावित किया है। वाहन की मरम्मत में पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में बीमरियों ने जकड़ लिया तो डॉक्टर की फीस और दवाओं पर भी खर्च करना होगा। जाम में फंस गए तो एक जगह खड़े-खड़े एक लीटर पेट्रोल फुंक जाने से भी बड़ा नुकसान हो रहा है।

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