हिफाजत के हथियार से कत्ल और खुदकुशी

Allahabad Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। हिफाजत के लिए रखे जानेे वाले हथियार सुरक्षा से ज्यादा मुसीबत बन रहे है। लाइसेंसी हथियार आत्महत्या और कत्ल में ही इस्तेमाल हो रहे हैं। एक भी ऐसी घटना किसी को याद नहीं होगी जब लाइसेंसी असलहे के बूते किसी ने अपनी सुरक्षा की हो। पुलिस भी परेशान है। सच तो यह है कि इधर कुछ सालों से असलहे हनक और धौंस जमाने के लिए ही खरीदे जाते हैं। आलम यह है कि पिछले तीन साल के दौरान इलाहाबाद में तकरीबन 150 लाइसेंस इसलिए निरस्त हुए कि असलहों का इस्तेमाल हत्या समेत दूसरी वारदातों में हुआ था।
मौजूदा दौर में असलहे धनबल का प्रतीक बन गए हैं। नतीजा यह कि पान दुकानदार हो शिक्षक या दूध विक्रेता। हर कोई शस्त्र खरीदने के फेर में रहता है। न कोई जरूरत और न जान पर खतरा मगर असलहे रखने का क्रेज ऐसा है कि जिसे देखो वही लाइसेंस के लिए भटक रहा है। वैसे तो शस्त्र लाइसेंस जरूरतमंदों को ही देने का प्रावधान है मगर होता ठीक उल्टा है। इस वक्त इलाहाबाद में 35 हजार से ज्यादा लाइसेंसी असलहे हैं। सभी हथियार आत्मरक्षा के लिए जरूरी बताकर खरीदे गए।
हालांकि पिछले पांच साल के पुलिस रेकार्ड पर गौर करिए तो दूसरी तस्वीर दिखती है। आत्मरक्षा में फायरिंग की एक भी घटना पुलिस रेकार्ड में नहीं दर्ज है, जबकि पांच साल में लाइसेंसी हथियार से हत्या और खुदकुशी की 19 घटनाएं हो चुकी हैं। रविवार सुबह एलनगंज की सीमैट कॉलोनी में छात्र आलोक यादव ने अपने चाचा रणजीत सिंह यादव की लाइसेंसी राइफल से गोली मारकर खुदकुशी की। इस दुखद घटना के बाद लाइसेंसी शस्त्रों के इस्तेमाल पर फिर सवाल उठा है। असलहे हिफाजत की बजाय हत्या और खुदकुशी में प्रयुक्त हो रहे हैं। शस्त्र लाइसेंस हासिल करने वालों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने हथियार का गलत इस्तेमाल नहीं होने देंगे लेकिन लापरवाही जारी है।
चर्चित रही घटनाएं
चार साल पहले करेली में प्रोफेसर ने गोली मारकर दी थी जान
नार्थ मलाका में एथलीट की बेटी ने मार ली थी पिस्टल से गोली
दो साल पहले ममफोर्डगंज में डॉक्टर ने कर ली थी खुदकु
प्रयाग में युवक ने पिता की रिवॉल्वर से छात्र की हत्या कीबमरौली में दो माह पहले लाइसेंसी बंदूक से युवक का खून
‘शस्त्र लाइसेंस आत्मरक्षा की खातिर हथियार खरीदने को दिया जाता है। गलत इस्तेमाल पर पुलिस मुकदमा लिख शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराती है। लोगों को ध्यान रखना होगा कि हथियार का दुरुपयोग न होने पाएं। हथियार को बच्चों समेत दूसरे लोगों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।’
शैलेश यादव, एसपी सिटी

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