सड़कों के कारण टूटा शरीर का ‘शॉकर’

Allahabad Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। हाथ, पैर की हड्डी टूट जाए तो कोई बात नहीं! तीन महीने में फिर से फिट हो जाएंगे लेकिन शरीर में बिना एक्सीडेंट के रोज हो रही न दिखने वाली टूट फूट उम्र भर रेंगने पर मजबूर कर रही है। खासतौर पर शहर में मोटरसाइकिल से चलने वालों का जो हाल है, वह बेहद डराने वाला है। केवल स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, बेली, काल्विन और चार प्रमुख हड्डी रोग विशेषज्ञों की क्लीनिक, अस्पतालों में पिछले छह महीने में नौ सौ से अधिक मरीज पहुंचे जिनके घुटने, टखने, मांसपेशियों में रैप्चर या फिर सियाटिका, स्लिप डिस्क की शिकायत रही। इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो मोटरसाइकिल से रोज शहर में 25 से 30 किलोमीटर चलते हैं। केवल मोटरसाइकिल सवारों के साथ ही ऐसा नहीं है। शहर की उबड़ खाबड़, गड्ढे गिट्टी वाली सड़कों पर चलने वाले ज्यादातर लोगों के शरीर का ‘शॉकर’ जवाब दे गया है। अस्थि रोग विशेषज्ञों का कहना है कि टूटी सड़कों पर जर्क के कारण कार्टिलेज घिस रहा है जिससे मांसपेशियों में टूटन की समस्या बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि हड्डियों में फ्रैक्चर के बजाय मांसपेशियों में रैप्चर ज्यादा खतरनाक है। रैप्चर में आमतौर पर किसी तरह की सर्जरी की गुंजाइश नहीं रहती इसलिए परेशानी ज्यादा होती है। इसके अलावा ऊबड़ खाबड़ सड़कों पर लगातार चलने से शरीर में जिन जगहों पर ‘शॉकर’ को झटका लग रहा है, उससे तमाम युवा सीधे खड़े होने को तरस गए हैं।
मांसपेशियों में टूट फूट केमामले पहले से तीन गुना
शहर की गड्ढे वाली उबड़ खाबड़ सड़कों पर मोटरसाइकिल चलाना और उतनी ही तेज ब्रेक मारना इतना बड़ा खतरा बन गया है कि इसके झटके से तमाम लोग न तो सीधे खड़े हो पा रहे हैं, न झुक पा रहे हैं। स्टेट फोरम ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के नए जर्नल में विशेषज्ञों के हवाले से इलाहाबाद के कई मरीजों का जिक्र किया गया है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.गिरीश नारायण ने चर्च लेन के जितेंद्र गर्ग, तेलियरगंज के सुशील अस्थाना का जिक्र किया है तो डॉ.केशव जायसवाल ने करेली के मो.शाहिद, बहादुरगंज के जयकिशन गुप्ता, कीडगंज के निमाई दास का केस जर्नल में दिखाया है जो पिंडलियों, उंगलियों, घुटने की मांसपेशियों में रैप्चर के कारण बिस्तर से नहीं उठ पा रहे हैं। सुशील और निमाई दास प्राइवेट बैंक में काम करते थे। उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
ऊबड़ खाबड़ टूटी सड़कों पर बाइकिंग यानी बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक बाइक की जो डिजाइन बन रही हैं, उसनें चलाने वालों की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं। ऐसे में रफ्तार के बाद अचानक गड्ढों के कारण झटका लगे या तेज ब्रेक लगाना पड़े तो मसल्स टूट जाते हैं। कार्टिलेज जो शरीर के लिए शॉकर का काम करते हैं, क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। एनडीए में चयनित इलाहाबाद का विप्लव ट्रेनिंग से बाहर हो गया क्योंकि उसके कोहनी की कुछ मांसपेशियां अकड़ गई थीं और मेडिकल परीक्षण में डॉक्टरों ने कह दिया कि हाथ सीधा नहीं हो सकता। फिजियोथेरेपिस्ट उसका इलाज कर रहे हैं। फोरम के सचिव डॉ.शिशिर सान्याल के मुताबिक बोन का टूटना बड़ा खतरा नहीं है। जर्क के कारण लिगामेंट और मसल्स टूट रहे हैं। लोगों को उसके बारे में पता नहीं चलता। मसल्स लगातार टूटते रहते हैं और पता तब चलता है जब हाथ, पैर या कमर टेढ़ी हो जाती है। उन्होंने शहर के अस्पतालों से आंकड़े जुटाए तो हैरान रह गए। अप्रैल, मई, जून के मुताबले, जुलाई, अगस्त, सितंबर में ऐसे मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई।
सावधानियां
जिन सड़कों पर गड्ढे हों, वहां बेहद धीमी गति से चलाएं बाइक
ब्रेकर या गड्ढा दिखने पर दूर से ही धीरे धीरे लगाएं ब्रेक, झटके से न लगाएं
डिजाइनर सीट वाली बाइक पर न बैठें, इससे कमर, रीढ़ को खतरा
भीड़ भाड़ वाली सड़कों पर चलें साइकिल की चाल ताकि अचानक रोकने की जरूरत न हो
डॉक्टरों के सुझाव
बाइक सवारी के बाद थोड़ी देर करें हाथ, पैरों की कसरत
कमर, पीठ में थोड़ा भी दर्द हो तो तत्काल कराएं जांच
पीठ, कंधे में तेज दर्द हो तो मालिश न कराएं, सिंकाई करें
मांसपेशियों की क्षमता बढ़ाने के लिए युवा रोज करें कसरत

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