कर्मचारियों की पेंशन का पैसा डूबने का खतरा

Allahabad Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। पेंशन फंड में 26 फीसदी एफडीआई निवेश को अनुमति मिलने से केंद्रीय कर्मचारी असंतुष्ट और परेशान हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि उनकी मेहनत की कमाई बाजार में लगाई गई तो वे कंगाल भी हो सकते हैं। कर्मचारियों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। इसके विरोध में कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्पलाइज ऐंड वर्कर्स ने 12 दिसंबर को देश व्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी है।
पहली जनवरी या उसके बाद नियुक्त केंद्रीय कर्मियों को नेशनल पेंशन स्कीम में शामिल कर लिया गया है। इन कर्मचारियों के वेतन से पेंशन मद में दस फीसदी की कटौती की जा रही है जबकि दस फीसदी धनराशि सरकार अपने अंशदान के तौर पर दे रही है। केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि पेंशन फंड का पैसा विभिन्न स्कीमों में लगाया जाएगा। इसके साथ ही पेंशन फंड में 26 फीसदी विदेशी निवेश को भी मंजूरी दे दी गई है। कर्मचारियों को आशंका है कि बाजार गिरा तो पेंशन का पैसा डूब जाएगा। दूसरी आशंका यह भी है कि भविष्य में विदेशी निवेश 50 फीसदी से ऊपर गया तो विदेशी कंपनियां अपने हिसाब से प्रबंधन संभालेंगी और वो तय करेंगी कि कर्मचारियों की पेंशन का पैसा किस स्कीम में लगाया जाए। ऐसे में कर्मचारियों को बड़ा नुकसान हो सकता है। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि उन्हें पुरानी पेंशन स्कीम के तहत पेंशन का भुगतान किया जाए या सरकार इस बात की गारंटी दे कि रिटायरमेंट के बाद वेतन की कम से कम 50 फीसदी रकम पेंशन के रूप में दी जाएगी लेकिन सरकार इस मसले पर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रही है, सो कर्मचारी की पेंशन का पैसा डूबने का खतरा बना हुआ है।
‘आर्म्डफोर्स और अर्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन नीति के तहत ही पेंशन दी जा रही है तो रेलवे एवं अन्य सिविलियन कर्मचारियों को नई पेंशन नीति में क्यों शामिल किया गया। चंद कर्मचारियों को इस स्कीम में शामिल करने से सरकार को कोई खास फायदा नहीं होने वाला, उल्टे कर्मचारियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। बेहतर है कि सरकार अपने कर्मचारियों के भेदभाव न करे और सबको समान रूप से पुरानी पेंशन नीति के तहत ही पेंशन का भुगतान करे।’
हरिशंकर तिवारी
विशिष्ट आमंत्रित सदस्य, आल इंडिया ऑडिट ऐंड एकाउंट एसोसिएशन

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