पुणे के शिवेंद्र ने जीता दामोदरश्री एवार्ड

Allahabad Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। एसएस खन्ना महिला महाविद्यालय की एक लाख रुपये वाली ‘दामोदरश्री’ निबंध प्रतियोगिता पुणे के शिवेंद्र सिंह ने जीती। शिवेंद्र सिमबॉयसिस इंटरनेशनल बिजनेस इंस्टीट्यूट में एमबीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। ईनामी राशि के लिहाज से यह सबसे बड़ी निबंध प्रतियोगिता है। मंगलवार को कालेज में आयोजित समारोह में विजेताओं की घोषणा की गई और उन्हें पुरस्कृत किया गया।
शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सैन्य एवं स्त्रेतजिक विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर दामोदर दास खन्ना के नाम पर दिए जाने वाले इस पुरस्कार के लिए ‘व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में शिक्षा की भूमिका’ विषय पर देश भर के छात्र-छात्राओं से निबंध मांगे गए थे, जिसमें आईआईटी, नेशनल लॉ कालेज, आईआईएम समेत सभी प्रांत से 267 निबंध पहुंचे। इनमें से 154 निबंध उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के थे। 14 सदस्यीय निर्णायक मंडल ने दो चरणों के परीक्षण के बाद 11 निबंध को पुरस्कारों के योग्य समझा। इन प्रतिभागियों ने मंगलवार को समारोह के प्रथम चरण में निबंध पर अपनी प्रस्तुति भी दी। सैकड़ों छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों की मौजूदगी में 10 निर्णायकों के पैनल ने इनसे सवाल भी पूछे। इस दौरान प्रतिभागियों न केवल मजबूती से अपनी बात रखी बल्कि विचारों से भी सभी को प्रेरित किया। इनमें से पांच निबंध विभिन्न पुरस्कार के लिए चुने गए।
51 हजार रुपये का द्वितीय पुरस्कार लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज नई दिल्ली में एमबीबीएस की छात्रा मोनिका गोयल को मिला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एमए प्राचीन इतिहास प्रथम वर्ष के छात्र सर्वेश सिंह ने 31 हजार रुपये का तृतीय पुरस्कार जीता। सर्वश्रेष्ठ छात्रा प्रतिभागी का पुरस्कार नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल के जी.नीतिका तथा सर्वश्रेष्ठ स्नातक वर्गीय प्रतिभागी का इनाम अलीगढ़ विश्वविद्यालय के मुद्दसिर रसूल को मिला। इनाम में इन्हें सर्टिफिकेट के अलावा 21-21 हजार रुपये मिले। एसएस खन्ना की विकलांग छात्रा नेहा मेहरोत्रा को 11 हजार रुपये का विशिष्ट पुरस्कार मिला। अलंकरण समरोह की मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने कहा कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन से सबकुछ पाया जा सकता है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीष अमिताव लाला ने छात्र-छात्राओं को स्वयं के साथ दूसरों को भी शिक्षित करने की अपील की। जेएनयू के प्रोफेसर पुष्पेष पंत ने वर्तमान शिक्षा नीति पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा से नौकरी मिल जाए तो काम की नहीं तो सबकुछ बेकार। संयोजन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। उपाध्यक्ष प्रोफेसर पीएन मेहरोत्रा ने प्रगति आख्या पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर दामोदरश्री स्मारिका के द्वितीय अंक का विमोचन भी हुआ। प्रोफेसर मानस मुकुलदास ने स्वागत किया। प्रबंधक महेश कपूर ने आभार प्रकट किया। समारोह में शिवेंद्र के पिता लखनऊ में कृषि वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह, मां साधना सिंह समेत पूरा परिवार मौजूद रहा।
लिखना मेरा जुनून है : शिवेंद्र
‘दामोदरश्री’ पुरस्कार के विजेता शिवेंद्र के लिए लिखना एक जुनून है। एमबीए का छात्र होने के बावजूद लिखने का शौक रखने वाले शिवेंद्र का कहना है कि साहित्य तथा सामाजिक मुद्दों पर पढ़ना उसे अच्छा लगता है। शिवेंद्र ने कहा, ‘राष्ट्रीय स्तर पर 269 लेख आए थे। उनमें चुना जाना उत्साह बढ़ाने वाला है। आगे भी लिखना चाहता हूं। इनाम में मिली राशि पढ़ाई में खर्च करूंगा।’ शिवेंद्र ने कहा, आम लोग भी अपने मूल्यों पर चलें तो सफलता जरूर मिलती है। पिता अतुल सिंह का कहना है कि यह पूरे परिवार के लिए गौरव की बात है। यह उसकी सच्चाई और लगन का परिणाम है कि वह न केवल इतना सोच और बोल पाया बल्कि देश की महान विभूतियों के बीच अपनी बात को प्रस्तुत भी कर सका। इससे उस पर भरोसा बढ़ने के साथ उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
सरकारी तंत्र पर सवाल खड़ा करता है यह एवार्ड
तृतीय पुरस्कार जीतने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सर्वेश का कहना है यह पुरस्कार सरकारी शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करता है। जो काम शिक्षण संस्थानों को करना चाहिए वह एक संस्था कर रही है। इस तरह के पुरस्कारों से अच्छा बनने तथा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों को यूजीसी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूनिसेफ आदि संस्थाओं से अरबों मिलने के अलावा सांस्कृतिक आयोजन के नाम छात्र-छात्राओं से भी लाखों रुपये फीस ली जाती है लेकिन इस तरह का कोई आयोजन नहीं होता। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सर्वेश ने कहा कि वह सिविल सर्विस में जाना चाहता है। आईएएस बनकर लोगों की दुश्वारियां दूर करना ही लक्ष्य है।
प्रथम 11 में चयनित विद्यार्थी
1.रवि शर्मा -आईआईटी कानपुर
2.मोनिका गोयल - एमबीबीएस लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज, नई दिल्ली
3.तेजा भगवती -बीएएलएलबी, नेशनल लॉ कालेज, जोधपुर
4.जी.नीतिका -बीएएलएलबी, नेशनल लॉ कालेज, भोपाल
5.शिवेंद्र सिंह -एमबीए, सिमबॉयसिस इंटरनेशनल बिजनेस इंस्टीट्यूट
6.मुद्दसिर रसूल -लॉ फैकेल्टी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
7.पारिजात प्रधान -जेआरएफ, समाजशास्त्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
8.सचिन श्रीवास्तव -एमबीए, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
9.निलांजन भट्टाचार्या -एमसीए, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
10.सर्वेश सिंह -एमए, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
11.अंकिता सिंह -बीएड, एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कालेज

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