क्वार की कातिल धूप और उमस से अटकने लगी सांस

Allahabad Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। दोपहर में पंखे के ठीक नीचे बैठने पर भी नहीं लगता कि हवा लग रही है। घर-बाहर कहीं भी राहत नहीं है। उमस के कारण आधी रात के बाद तक बेचैनी में करवटें बदलते रहते हैं। रात दो बजे के बाद हवा नम होने पर किसी तरह नींद आती भी है तो भोर में ही सांस फूलने लगती है। नखासकोहना, अतरसुइया, सब्जी मंडी, कोतवाली, चौक, हटिया, बहादुरगंज, मुट्ठीगंज, करेली, दरियाबाद, रोशनबाग जैसी घनी बस्तियों में तो हाल और खराब है। कमरे के अंदर बैठना मुश्किल है। देर रात तक लोगों को बेचैन टहलते देखा जा सकता है। भारी उमस के बीच चटख धूप ने परेशानी और बढ़ा दी है। दोपहर में धूप सिर पर हथौड़े सी लगती है। क्वार की धूप वैसे भी खतरनाक मानी जाती है, इन दिनों तो यह कातिल सी नजर आने लगी है। तेज धूप और भारी उमस के कारण चक्कर और बेहोशी के मरीज कई गुना बढ़े हैं।
बारिश थमे बमुश्किल दस दिन हुए हैं लेकिन लग रहा मानों महीनों से बरसात नहीं हुई। वातावरण में आर्द्रता है लेकिन धूप इस कदर तीखी हुई है कि उसने मौसम का मिजाज ही बदल दिया है। आर्द्रता के कारण भोर में मौसम नम रहता है लेकिन इससे सुकून कम, परेशानी ज्यादा है। दो तरह के मौसम के कारण वायरल का घेरा और कस गया है। वायरल के साथ तेजी से बुखार दिमाग पर अटैक कर रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि इन दिनों बुखार असहनीय सिर दर्द के साथ शुरू हो रहा है, जो ज्यादा खतरनाक है। यह कातिल धूप का असर है जिससे बचना होगा।
अटकने लगी सांस
भोर की भारी नमी और दिन की कड़क धूप श्वांस के मरीजों को परेशान करने लगी है। अस्पताल में सांस फूलने के साथ दमा, चक्कर आना, अचानक बेहोशी, माइग्रेन के रोगियों की भीड़ है। शुक्रवार-शनिवार को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, बेली और काल्विन में सांस फूलने और बेहोशी के 170 मरीज पंजीकृत किए गए जबकि रविवार को तीन प्रमुख प्राइवेट अस्पतालों में इन बीमारियों के सौ से अधिक मरीज दवा लेने पहुंचे। इनमें से 30 को भर्ती किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि भारी मौसम में सांस लेने में तकलीफ होती है जो कई बार घातक हो जाती है।
बारिश अधिक लेकिन जमीनी उष्मा कम नहीं
जुलाई, अगस्त, सितंबर में अबकी बारिश औसत से अधिक हुई लेकिन जमीनी उष्मा में कमी नहीं आई। सावन, भादों की बारिश ने तापमान कम किया था लेकिन आसमान खुलते ही निचला पारा चढ़ने लगा है। मौसम विज्ञानी डॉ.तपन कुमार बिष्ट के मुताबिक आर्द्रता लगातार बनी हुई है जिसके कारण जमीनी उष्मा ऊपरी वातावरण में नहीं जा पा रही और लोगों को भारी उमस का सामना करना पड़ रहा। इन दिनों यदि बारिश होती तो आर्द्रता 90 फीसदी के आसपास और सामान्य दिनों में 70 फीसदी होनी चाहिए लेकिन बगैर बारिश नमी काफी अधिक है जिसने शरीर को झटका दिया है।
शरीर के लिए खतरा
मौसम सामान्य न होने के कारण नमी सेहत के लिए खतरा बन गई है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और फिजिशियन डॉ. गिरीश बरनवाल के मुताबिक जिन लोगों को सांस की थोड़ी सी भी समस्या है, उनके लिए यह मौसम खतरनाक है। साथ ही माइग्रेन, स्पांडिलाइटिस, कमर दर्द, गठिया मरीजों के लिए भी तेज धूप और नमी के मेल वाला यह मौसम ठीक नहीं है। जब तक नमी ज्यादा है, उन्हें अतिरिक्त ध्यान रखना होगा।
क्या बरतें एहतियात
बिस्तर वहां लगाएं, जहां हवा आने का माध्यम हो
दिन हो या रात हल्के सूती कपड़े पहने
सुबह से रात तक थोड़ी थोड़ी देर में पानी पीते रहें
ज्यादा पसीना हो तो कुछ देर खुली जगह पर बैठें
गर्मी लगने के बाद भी कूलर कतई न चलाएं
बच्चों को रात में हल्की पतली चादर ओढ़ाएं

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