चुनाव विवि-कालेजों का, परेशानी लोगों की

Allahabad Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा कालेजों में छात्रसंघ चुनाव आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन जारी है जिसका खामियाजा लोगों को भी उठाना पड़ा। बृहस्पतिवार को तो नेताओं के वाहन जुलूस के कारण परिसर के चारों तरफ दिन भर जाम की स्थिति रही। इसकी वजह से आवागमन तकरीबन ठप रहा। अभी लोगों को तीन दिन तक इस तरह की समस्याओं से रूबरू होना पड़ेगा। 30 सितंबर को विजय जुलूस निकलने के बाद ही राहत की उम्मीद है।
बुधवार को नामांकन फार्म की जांच में लिंगदोह समिति की सिफारिशों का मजाक बना तो आचार संहिता का पालन करवा पाने में भी विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन पूरी तरह से विफल है। दक्षता भाषण के मद्देनजर बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय के आसपास सुबह से ही जुलूस निकलने लगे। अधिकतर प्रत्याशियों के काफिले में 20 से 25 वाहन शामिल रहे। इनमें भरे छात्र नारेबाजी करते हुए चल रहे थे। एक प्रत्याशी तो वाहन की छत पर ही खड़ा हो गया था। आलम यह रहा कि विश्वविद्यालय रोड, बैंक रोड, लक्ष्मी टाकीज चौराहा आदि जगहों पर छात्रों का ही कब्जा रहा। इस दौरान भारी संख्या में फोर्स भी मौजूद रही तो कुछ दूरी पर एसएसपी और डीएम का भी कार्यालय है लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं दिखा। यही स्थिति एडीसी, सीएमपी डिग्री कालेज और ईश्वर शरण डिग्री कालेजों के आसपास भी है। इससे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
पंफलेट, हैंडबिल से पटा परिसर
छात्रसंघ चुनाव में प्रिंटेड प्रचार सामग्री के उपयोग पर प्रतिबंध है लेकिन इस नियम का कितना पालन हो रहा है इसका नमूना दक्षता भाषण के दौरान परिसर तथा सड़क पर पड़े पंफलेट, हैंडबिल के ढेर के रूप में देखा जा सकता था। पूरी सड़क प्रचार सामग्रियों से पट गई थी। खास यह कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई है लेकिन कार्रवाई होती है या नहीं यह देखने वाली बात होगी।
छेड़खानी पर छात्राओं ने तरेरी आंख
‘मेरी हिम्मत को सराहो मेरे साथ चलो। क्योंकि मैंने एक शमा जला दी है इन हवाओं के खिलाफ।’ बृहस्पतिवार को यह हुंकार भरी विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में दावेदारी करने वाली छात्राओं ने। यह पहला मौका रहा जब छात्रसंघ भवन से दक्षता भाषण में उपाध्यक्ष पद की उम्मीवार तीन छात्राओं ने संबोधित किया। इन छात्राओं ने परिसर में छेड़खानी के खिलाफ आवाज बुलंद की तो राजनीति में महिलाओं की भूमिका पर भी खुलकर बोला। शालू यादव ने छात्राओं के अधिकार के लिए सक्रिय महिला सेल, हेल्प सेंटर की मांग की। उसने लाइब्रेरी, विश्वविद्यालय को केंद्र से मिला पैसा वापस होने समेत कई अन्य मुद्दे भी उठाए। विनीता मिश्रा ने कहा कि राजनीति में लड़कियां भी आना चाहती हैं लेकिन असुरक्षा महसूस करती हैं। उसने इसके खिलाफ संघर्ष की घोषणा भी की। संचिता सिंह ने इन मुद्दों को उठाने के साथ छात्र-छात्राओं से मतदान में भाग लेने की भी अपील की।
सुरक्षा के नाम पर प्रत्याशियों पर निगरानी
विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी पुलिस सुरक्षा में प्रचार करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही गैंगवार की आशंका जता चुका है। एलआईयू ने भी कुछ इसी तरह की रिपोर्ट दी है। इसके मद्देनजर इन पदों के हर प्रत्याशी की सुरक्षा में दो-दो पुलिस कर्मी लगाए गए हैं। जिला और पुलिस प्रशासन इस बहाने पर इन नेताओं की हर गतिविधि पर भी नजर रखना चाहता है।
चुनाव में कूदे राजनेता
छात्रसंघ चुनाव में राजनीतिक दलों के नेता भी खुलकर सामने आ गए हैं। पूर्व मंत्री बाबूलाल भंवरा, अशोक त्रिपाठी आदि नेताओं ने प्रबद्धवादी बहुजन छात्र संगठन से चुनाव लड़ रहे अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सत्यवान पटेल, उपाध्यक्ष पद की संचिता सिंह, महामंत्री अविनाश दुबे, सांस्कृतिक मंत्री गौरव कुमार भारतीया तथा संयुक्त मंत्री पद के उम्मीदवार चंद्रशेखर गौतम के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने ईश्वर शरण डिग्री कालेज गेट, बघाड़ा रेलवे क्रासिंग आदि स्थानाें पर सभा भी की। एनएसयूआई के पैनल से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के समर्थन में विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, दिल्ली से आए नेताओं ने प्रचार किया। समाजवादी छात्रसभा के उम्मीदवारों ने विधायक संग्राम सिंह यादव के नेतृत्व में जुलूस निकाला।
बहुरुपिए भी पहुंचे
छात्रसंघ चुनाव में प्रचार के लिए बहुरुपियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। काले रंग के कपड़ों में लिपटा एक बहुरुपिया भ्रष्टाचार, महंगाई के खिलाफ आवाज लगा रहा था। उसने चेहरे पर भी काला रंग लगा रखा था। एक अन्य बहुरुपिया छात्रसंगठन के प्रत्याशियों का प्रचार कर रहा था।
अभी से खाली हुआ परिसर
विश्वविद्यालय के आम छात्र-छात्राओं में छात्रसंघ चुनाव के प्रति बहुत उत्साह नहीं दिखाई दे रहा। सीनेट परिसर में खाली कक्षाओं को देखकर विश्वविद्यालय प्रशासन तथा छात्र नेताओं को कम वोटिंग की आशंका अभी से सताने लगी है। बृहस्पतिवार को अधिकतर कक्षाओं में उपस्थित ना के बराबर है। छात्र-छात्राओं की इस निराशा के पीछे मुद्दा विहीन चुनाव के अलावा अपराधी छवि वाले तथा पढ़ाई से दूर तक वास्ता नहीं रखने वाले प्रत्याशियों का मैदान होना प्रमुख कारण हैं।

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