तबाही के ढेरों निशान छोड़ गई बारिश

Allahabad Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। गरीबी में आटा कैसे गीला होता है, देखना है तो मीरापट्टी पहुंचें। बारिश और बाढ़ अपने पीछे तबाही की ढेरों निशानियां छोड़ गई है। दस दिनों तक घरों में कैद रहने के बाद लोग अब अपनी गृहस्थी समेट रहे हैं, जिसमें सड़े हुए अनाज, पानी से लुग्दी बन चुकी किताब-कॉपियां, धंसी हुई फर्श की सीमेंट और ईंटे, बंद पड़ी टीवी, गंदे पानी से सने हुए गद्दे, रजाई, चादर, तकिया, ब्रीफकेस और अलामारी में रखे कपड़े, रुपये, जंक खा चुकी लोहे की अलमारियां, पानी लगने से सड़ चुके सोफे, कुर्सी मेज जैसी चीजें शामिल हैं। यह कहानी तो सिर्फ मीरापट्टी की है, अल्लापुर और जॉर्जटाउन में रहने वालों को भी कम नुकसान नहीं हुआ है। घरों से पानी निकलने के बाद फर्श पर जमे कीचड़ को साफ कराने में ही डेढ़ से दो हजार रुपए खर्च हो गए। वहीं, अपार्टमेंट में सिर्फ सफाई कराने पर पांच से छह हजार रुपए लोगों का खर्च करने पड़े। पानी लग जाने से टीवी खराब हो गई, फर्नीचर सड़ गए और गृहस्थी के तमाम सामान भी बर्बाद हो गए। औसतन एक परिवार को 20 से 40 हजार रुपए तक का नुकसान हुआ। बारिश और जलजमाव से प्रभावित कुल परिवारों की बात करें तो उनकी संख्या दस हजार से भी ज्यादा है, जिन्हें अब बेवजह नगर निगम और जल संस्थान की गलतियों का खामियाजा उठाना पड़ रहा है।
फर्श बची न चादर, छत में गुजर रही रात
मीरापट्टी के तिलकधारी राम के घर में रखे गद्दे, रजाई, चादर गंदे पानी में भीगकर बर्बाद हो गए। सभी कमरों की फर्श भी धंस गई। तिलकधारी और उनके परिवार की रात अब छत पर गुजारनी पड़ रही है तो दिन गृहस्थी समेटने में बीत जा रहा है। बच्चे खुले आसमान के नीचे रात बिताने से बीमार हो गए हैं।
मिट्टी में मिल गई बच्चों की मेहनत
मीरापट्टी में रहने वाले आरपी यादव के बच्चों की परीक्षाएं नजदीक थीं लेकिन इस बार बच्चे परीक्षा नहीं दे सकेंगे। उनके घर में पानी घुसने से बच्चों की किताब-कॉपियां लुग्दी बन गईं। कमरे में रखी अलमारी में पानी घुस जाने से कपड़े खराब हो गए तो आलमारी में भी जंक लग गया।
पैरों तले खिसक गई जमीन
मीरापट्टी में घरों में घुसा पानी जब कम हुआ तो छत में कई दिनों से परिवार संग रातें बिता रहीं मीना देवी नीचे के कमरों को हाल देखने पहुंची। वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों कमरों की फर्श पूरी तरह से धंस चुकी थी। दीवारों पर दरार आ चुकी थी और कमरों में रखा गृहस्थी का हर सामान बर्बाद हो चुका था। मीना को सिर्फ फर्श की मरम्मत कराने में ही 50 हजार रुपए खर्च करने पड़ जाएंगे।
छतों पर पहुंच गई गृहस्थी
मीरापट्टी में बारिश और बाढ़ अपने पीछे तबाही की जो निशानियां छोड़ गईं, उससे अब तक लोग सहमे हुए हैं। श्रीचंद पटेल सहित तमाम लोग की गृहस्थी अब उनके घरों की छतों पर पहुंच गई है। उन्हें हर वक्त डर सताता रहता है कि कहीं पानी दोबारा घरों में न घुस जाए। पानी के साथ घरों में डेरा जमा चुके सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतु परिवार के सदस्यों के लिए जानलेवा न बन जाएं।
सड़ गया गेहूं, आटा भी हुआ गीला
मीरापट्टी में रहने वाले नंदू सिंह यादव ने गांव से साल भर का अनाज मंगाकर एक साथ रख लिया था गेहूं और चावल गंदे पानी में भीगकर सड़ गया और दो बोरों में रखा आटा भी गरीबी में गीला हो गया। नीचे के कमरों में पांच टोकरियों में लागू, प्याज और तमाम सब्जियां रखी हुई थीं लेकिन पानी से सब सड़ गईं।

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