दोपहर भोजन के नाम पर मिल रहा केवल प्रसाद

Allahabad Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। दुनिया भर में आर्थिक संकट का हवाला देकर सरकार ने रसोई गैस, डीजल, पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी। इसके फेर में घरेलू उपयोग की चीजें महंगी हो गईं लेकिन प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे उन मासूमों पर सरकार की नजर नहीं है जो दोपहर भोजन की आस में घंटों इंतजार करते हैं। बजट की कमी के कारण ज्यादातर स्कूलों में भोजन नहीं बन रहा या फिर केवल खिचड़ी बनाकर बला टाली जा रही है। खिचड़ी भी बस इतनी कि प्रसाद की तरह बांट दी जाए।
मिड डे मील के लिए सरकार जो बजट दे रही है, उसमें भोजन बन भी नहीं सकता। सरकार की तरफ से एक बच्चे के एक दिन के भोजन के बदले केवल तीन रुपए 11 पैसे निर्धारित हैं। बजट और मेनू का औसत सौ बच्चों के हिसाब से बनाया गया है। सौ बच्चों के बदले प्रतिदिन 311 रुपए स्कूलों को मिलते हैं लेकिन महंगाई इस कदर बढ़ी है कि इस बजट में मेनू के मुताबिक तो दूर, सामान्य भोजन देना भी संभव नहीं है।
भोजन के कनवर्जन कास्ट में ही रसोई गैस भी
प्राथमिक विद्यालयों में भोजन के मद में सौ बच्चों के लिए कनवर्जन कास्ट के तौर पर 311 रुपए मिलते हैं लेकिन इस बजट का बड़ा हिस्सा तो रसोई गैस में चला जाता है। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में जहां रसोई गैस आसानी से नहीं मिल पाती, वहां लकड़ी जलाकर भोजन पकाया जाता है जिसमें इससे ज्यादा रकम खर्च होती है। प्राथमिक विद्यालय समहन, प्राथमिक विद्यालय सोतवा, जारी के प्रधानाध्यापकों ने सौ बच्चों पर खर्च का बजट तैयार किया है। बताया कि यदि सौ बच्चों का बेहद साधारण भोजन महीने में 21 दिन बने तो दस हजार रुपये से कम खर्च नहीं बैठता जबकि 21 दिन के हिसाब से मिले केवल लगभग सात हजार रुपए। महीने में कहीं डेढ़ तो कहीं दो रसोई गैस लग जाती है। यानी वर्तमान में प्रतिदिन के हिसाब से औसतन 600 से 800 की रसोई गैस। साफ है कि भोजन के मद का बड़ा हिस्सा तो गैस में निकल जा रहा।
मानक के कम दिया जा रहा भोजन
प्राथमिक विद्यालय जगहां के प्रधानाध्यापक सुशील वर्मा, रमईपट्टी की विमला त्रिपाठी, मनकापुर की अंजू सिंह ने माना कि बजट के अभाव में बच्चों को मानक से बेहद कम भोजन दिया जा रहा है। बताया कि चावल मुफ्त में मिल जाता है इसलिए ज्यादातर विद्यालयों में हफ्ते में चार दिन खिचड़ी बनाई जाती है। खिचड़ी में आंशिक दाल और दो-चार आलू डाल दिया जाता है। समहन के प्रधान वैभवनाथ, सोतवा के प्रधान सुखलाल प्रजापति ने बताया कि कई दफे आलू और दाल भी लोगों से मांगना पड़ता है क्योंकि बजट में वह नहीं मिल पाता।
महंगी मिलेगी गैस तो खिचड़ी भी मुश्किल
केंद्र सरकार ने छह के बजाय सातवें सिलेंडर पर सब्सिडी खत्म कर दी है। यानी सातवां सिलेंडर महंगा मिलेगा। स्कूलों में हर महीने लगभग दो सिलेंडर लग जा रहेस यानी साल में 24 सिलेंडर। छह सिलेंडर के बाद बाकी पर 746 रुपए देने होंगे यानी बजट दोगुना। जाहिर है वहां परेशानी और अधिक होगी। बजट अपने आप बढ़ जाएगा। ऐसा हुआ फिर तो खिचड़ी भी नहीं मिल सकेगी। अधिकारियों ने फिलहाल इसका कोई विकल्प नहीं तलाशा है।

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