‘विज्ञान समागम’ में शामिल होंगे विदेशी छात्र

Allahabad Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
‘विज्ञान समागम’ में शामिल होंगे विदेशी छात्र
ट्रिपलआईटी के दीक्षांत समारोह में चांसलर ने दी जानकारी
सार्क, आसियान, अफ्रीकी देश के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने भरी इंट्री
एमटेक के कवींद्र कांडपाल को चांसलर मेडल, निशा और थामस को दो पदक
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में दिसंबर में होने वाला पांचवां ‘विज्ञान समागम’ अब सचमुच अंतरराष्ट्रीय समारोह बनने जा रहा है। इस बार नोबेल पुरस्कार विजेताओं तथा अपने-अपने फील्ड के माहिर वैज्ञानिकों से विदेशी छात्र-छात्राओं को रूबरू होने का मौका मिलेगा। संस्थान के सातवें दीक्षांत समारोह में चांसलर प्रोफेसर गोवर्धन मेहता ने बताया कि इसके लिए सार्क, आसियान और अफ्रीकी देश के छात्र-छात्राओं की भी इंट्री लिखाई है।
संस्थान के ‘विज्ञान समागम’ में देश भर के शिक्षण संस्थानों के 1500 चुनिंदा छात्र-छात्राओं को नोबेल पुरस्कार विजेताओं से बात करने का मौका मिलता रहा। पिछले साल भी कोशिश की गई थी कि विदेशी छात्र-छात्राओं को इसमें शामिल किया जाए। हालांकि पिछले साल तो इसमें सफलता नहीं मिल पाई लेकिन इस बार इस परंपरा की शुरुआत होने जा रही है। दीक्षांत समारोह में निदेशक डॉ. एमडी तिवारी ने बताया कि इसके लिए प्रक्रिया शुरू है और 50 से अधिक विदेशी छात्र-छात्राओं ने इंट्री लिखाई है। बताया कि कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भी समारोह में आने के लिए हामी भर दी है।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रोफेसर मेहता ने डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पांच मंत्र दिए। कहा कि छात्र को बहुमुखी होना चाहिए। उन्होंने रवींद्र नाथ टैगोर और वैज्ञानिक प्रोफेसर मेघनाद साहा का उदाहरण भी दिया। बताया कि प्रोफेसर साहा पेंटर और फिजिशियन भी थे। प्रोफेसर मेहता ने छात्र-छात्राओं से बड़ा सोचने तथा हर असंभव सी दिखने वाली चुनौती को स्वीकार करने की नसीहत दी। कहा कि जीवन में सफलता के लिए असफल होना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए असफलता से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि एक सीढ़ी के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने हर मौके को बेहतर अवसर के रूप में बदलने तथा बदलाव का वाहक बनने को कहा। प्रोफेसर मेहता ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपने निजी हित ऐसा चुनें जिसमें सभी का फायदा निहित हो। इससे पहले निदेशक ने दीक्षांत समारोह की प्रोसिडिंग की। इस मौके पर 466 बीटेक, एमटेक और शोध छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। एमटेक के कवींद्र कांडपाल को चांसलर मेडल मिला। बीटेक की निशा और थामस ने दो-दो पदक हासिल किए।
निदेशक डॉ. एमडी तिवारी ने संस्थान की योजनाओं और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि संस्थान की स्थापना 1999 में हुई थी। इतने कम समय में यह विश्व का एक्सीलेंस संस्थान बन गया है। समारोह में अनेक शिक्षक, अफसर, विद्यार्थी उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

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