जलनिकासी को पंप लगाने में हीलाहवाली पर भड़के लोग

Allahabad Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। चार दिन से जहरीले पानी में फंसे मीरापट्टी मोहल्ले के लोगों का सब्र मंगलवार को जवाब दे गया। पानी निकालने को काम को गंभीरता से न लेने से भड़के लोगों ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अभियंताओं को घेर लिया। हालांकि लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। इसके बाद पानी निकालने के काम में तेजी आई और शाम तक तकरीबन चार फीट पानी कम हो गया। हंगामे से घबराए नगर निगम के कर्मचारी तालाब से पानी निकालने के लिए लगाए गए पंप को छोड़कर भाग गए।
शुक्रवार रात मुंडेरा मंडी तालाब के टूटी दीवार से पानी मीरापट्टी में घुस गया था। इसके बाद सोमवार को राहत कार्य में तेजी आई। मंगलवार सुबह गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने मोहल्ले में दो पंप लगाकर पानी तालाब में डालना शुरू किया, जबकि 35 हार्स पावर का पंप तालाब में लगाया गया, ताकि पाइप के जरिए गंदा पानी ट्रांसपोर्ट नगर नाले में डाला जा सके। यह पाइप बार-बार फट जा रहा था। इस बीच इंतजाम में देरी पर लोग भड़क गए और इकाई के एई वीएस गुप्ता और जेई इश्तियाक अहमद को घेर लिया। लोगों के बीचबचाव के कारण मारपीट की नौबत नहीं आई। इसके बाद आनन-फानन में तीन पंप और नया पाइप मंगाया गया। पांच पंप लगाकर मोहल्ले का पानी निकाला गया, जबकि बड़े पंप से पानी ट्रांसपोर्ट नगर नाले में भेजा गया।
मंगलवार को तीज का त्योहार होने की वजह से मीरपट्टी की तमाम महिलाओं ने भी व्रत रखा। पानी की वजह से महिलाएं घर से नहीं निकल सकीं, ऐसे में बड़े, बुजुर्ग नाव के सहारे पानी से बाहर आए और बाजार से पूजा का सामान ले गए। बुजुर्ग दीनदयाल प्रसाद ने बताया कि घर में महिलाएं व्रत हैं, मगर पानी भरने की वजह से उन्हें सामान लेने जाना पड़ा।
मीरापट्टी के सैकड़ों लोग समस्या से निजात के लिए तड़प रहे हैं, मगर प्रशासनिक अमले की लापरवाही लगातार बनी हुई है। प्रशासन की ओर से रविवार और सोमवार को ब्रेड, पूड़ी और सब्जी बंटवाई गई, मगर मंगलवार को प्रशासन का कोई अफसर या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। हालांकि लोग नाश्ते और खाने के इंतजार में दोपहर तक बैठे रहे। इसके बाद बाजार से नाश्ता लेकर आए।
मीरापट्टी से खतरा अभी टला नहीं है। मिट्टी कटने से तालाब का तटबंध कई जगह कमजोर हो चुका है और इसमें कटाव जारी है। मंडी परिषद ने तालाब का क्षतिग्रस्त तटबंध सुरक्षित रखने के लिए कोई उपाए नहीं किए। उल्टे मंडी उप निदेशक (निर्माण) आईए वारसी यहां के लोगों से कह रहे हैं कि उन्होंने निचले इलाके में मकान क्यों बनाया। इससे भड़के लोगों ने वारसी को घेरने का भी प्रयास किया लेकिन कांग्रेस नेता तारिक सईद अज्जू ने बीच बचाव कर मामला संभाला। परिषद ने केवल टूटे तटबंध की जगह बोरी लगवाकर मिट्टी भरवा दी। मंगलवार को मंडी परिषद ने काम बंद करा दिया। मामले पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के एई वीएस गुप्ता ने कहा कि परिषद की लापरवाही से तटबंध कई जगह से टूट सकता है।
मीरापट्टी में लोगों के गुस्से के बाद भले ही राहत कार्य में तेजी आई हो मगर मंगलवार को यहां कोई भी अफसर पीड़ितों का हालचाल लेने नहीं पहुंचा। निगम प्रशासन, जलकल विभाग, प्रशासन अमले के अफसर केवल स्थानीय नेताओं के संपर्क में रहे, जिसका लोगों को मलाल रहा। यहां तक कि बात-बात में धरना प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरने वाले समाजसेवियों ने भी यहां से दूरी बनाए रखी।

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