कुंभ क्षेत्र में दारू और दबंगों से सब दुखी

Allahabad Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
दारागंज की दुर्दशा
0दारागंज में प्रवेश द्वार पर ही खुली हैं दारू की दुकानें, महिलाओं. युवतियों पर कसते हैं फब्तियां
0कालेज की छात्राओं के सामने पियक्कड़ करते हैं हुडदंग, गाली गलौज, मारपीट
0मंदिर और स्कूल के पास दे दी गई दारू की दुकान, शाम के बाद महिलाओं से बदसलूकी
इलाहाबाद। संगम की रेती से सटे मुख्य कुंभ क्षेत्र का अहम हिस्सा होने के बावजूद दारागंज के लोग बिजली, पानी, सड़क, सफाई जैसी नागरिक सुविधाओं से तो जूझ ही रहे हैं, दारू के अड्डों ने भी यहां के लोगों का जीना दूभर कर रखा है। दारू पीकर उत्पात मचाने वालों से हर कोई परेशान है लेकिन उनकी दबंगई के खिलाफ दबी जुबान में भी आवाज उठाने की हिमाकत कोई नहीं करता। भय है कि दूसरे दिन घर पर चढ़कर तोड़फोड़ करेंगे और प्रशासन बस देखता रहेगा। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यह मुख्य कुंभ क्षेत्र है। यहां दारू की दुकान के लिए इजाजत ही नहीं मिलनी चाहिए थी। महाकुंभ में करोड़ों देसी विदेशी श्रद्धालु दारागंज में रहेंगे, यहां के ऐतिहासिक मंदिरों में पूजा करेंगे, पंचकोशी परिक्रमा होगी, ऐसे में दारू की दुकानें काला धब्बा जैसी हैं।
प्रवेश द्वार पर ही दारू की दुकान
नाविक और तीर्थपुरोहित समाज सहित सभी चाहते हैं कि मठ, मंदिरों, अखाड़ों वाले दारागंज क्षेत्र में दारू की दुुकानें दूर-दूर तक न दिखें। दारागंज में मंदिर और स्कूल के आसपास ही दारू की दुकानें हैं। डॉट का पुल से आगे दारागंज में प्रवेश करने पर दारू की दुकानें ही स्वागत करती हैं। जीटी रोड पर देसी और अंग्रेजी की दुकानों के अतिरिक्त कच्ची सड़क पर भी दारूबाज जुटते हैं।
छात्राओं पर करते हैं छींटाकशी
शाम होते ही जब पियक्कड़ों की पूरी फौज जुटती है तो फिर किसकी मजाल कि उन्हें रोक सके। स्कूल-कालेज से लौटती लड़कियों, बाजार जाती महिलाओं की तो शामत है। छात्राएं, महिलाएं सिर झुकाकर निकलती हैं लेकिन छिछोरे उन पर फब्तियां कसने से बाज नहीं आते। इसके अलावा बड़ी संख्या में दारुबाज आए दिन हुड़दंग मचाते हैं जिससे महिलाओं को परेशानी होती है।
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हर कोई हैरान
‘दारूबाजों के कारण रात-बिरात आने-जाने में तो दिक्कत होती ही है। स्कूल-कालेज की बड़ी-बड़ी लड़कियां, बहू-बेटियां भी जीटी रोड से ही घर लौटती हैं। उन्हें फब्तियां सुननी पड़ती हैं। शाम के बाद पियक्कड़ों की मौजदूगी से डर बना रहता है।’
0 विमला यादव
जीटी रोड, दारागंज
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‘पियक्कड़ रोज खूब हुड़दंग करते हैं। बहिन-बिटिया के रास्ता चलना मुश्किल है। दारागंज में तो ई सब नय होय के चाही लेकिन अधिकारी पइसा लेकर दारू बेचय कय ठेका दई दिन। जेके जहां मन होय, उहां दुकान चलावै लेकिन मगर हियां न रहै।’
0 चंदन देवी
गौरीशंकर मंदिर, दारागंज
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‘पियक्कड़ों से बहुत परेशानी होती है। आते-जाते लड़कियों, महिलाओं पर कमेंट्स करते हैं। कोई दूर से गुजरे तो भी गालियां सुनने को मिल जाती हैं। आए दिन दारू पीकर दो-तीन का सड़क पर लुढ़के रहना तो अक्सर दिखाई देता है।’
0 पूजा केसरवानी
जीटी रोड, दारागंज
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‘दारूबाजों से महिलाओं, बेटियों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। दारू कूी दुकान से थोड़ी ही दूरी पर स्कूल और कई मंदिर भी हैं। पियक्कड़ों के जमावड़े से शाम के बाद मंदिर जाना मुश्किल है लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।’’
0 विमला निषाद
कच्ची सड़क, दारागंज
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‘‘कम से कम कुंभ क्षेत्र दारागंज को तो शराब की दुकानों से मुक्त होना चाहिए। हैरानी की बात है कि दारागंज में प्रवेश मार्गों पर जीटी रोड और कच्ची सड़क पर शराब की दुकानें हैं। मोहल्ले की लड़कियों, महिलाओं के साथ दूसरे मोहल्लों से आने वाली युवतियों को भी छेड़खानी का सामना करना पड़ता है, जो बेहद शर्मनाक है।’
0 राधिका देवी
रेलवे स्टेशन, दारागंज

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