शहर की बदहाली पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

Allahabad Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
जनहित याचिका पर राज्य सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश
जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के बजाए सीधे डीएम दें जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। शहर की बदहाली और आसन्न महाकुंभ के कार्यों की हो रही लेटलतीफी पर हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों में भारी घोटाले को लेेकर दाखिल जनहित याचिका पर न्यायालय ने याची अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में जलनिगम और प्रदेश सरकार सहित अन्य संबंधित विभागों को भी पक्षकार बनाएं ताकि कुंभ मेले के कार्यों की भी मॉनिटरिंग हो सके। जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अमिताव लाला और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय से इस मामले में निर्देश प्राप्त करने को कहा है।
याचिका में कहा गया है कि नगर निगम के अधिकारी गृहकर में बेतहाशा वृद्धि कर रहे हैं, जबकि जन सुविधाएं कम होती जा रही हैं। शहर के लोगों को गंदगी, बजबजाती नालियां-नाले तथा इनसे फैल रहीं बीमारियां ही मिल रही हैं। नगर निगम अधिकारियों द्वारा यूनीपोल लगाने और सड़क के किनारे की प्रचार सामाग्रियों के नाम पर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम अधिकारियों ने मार्ग सूचना पट्ट लगाने में एक संस्था को ठेका देने में करोड़ों रुपए का घोटाला किया है। इस संस्था द्वारा कर वसूली के मद में प्रीमियम की 10 करोड़ 33 लाख 20 हजार रुपए की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। नगर निगम द्वारा इसे मांगा भी नहीं जा रहा है। सिविल लाइंस के सौंदर्यीकरण के लिए एडीए ने 25 करोड़ रुपए की योजना बनाई है। इसके बावजूद नगर निगम पत्थर गिरिजाघर से लेकर एटलांटिस मॉल तक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए कार्य करा रहा है, जो गलत है।
निगम की नियमावली अवैध, सदन सर्वोच्च
इलाहाबाद। जनहित याचिका पर अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र ने कहा कि हाईकोर्ट की फुलबेंच द्वारा पारित आदेश में नगर निगम की नियमावली को अवैध घोषित कर दिया गया है। फुलबेंच ने साफ तौर पर कहा है कि सदन सर्वोच्च है। इसके बाद से अब नगर निगम अधिकारियों को गृहकर आदि के संबंध में फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं रह जाता है। याचिका में नगर निगम के विधि सलाहकार एसएल यादव की नियुक्ति को अवैध बताते हुए उनको पद से हटाए जाने की मांग की गई है। याचिका पर अगली सुनवाई छह सितंबर को होगी।

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