मांसपेशियों पर मानसून का साइड इफेक्ट

Allahabad Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
दो महीने से 100 फीसदी नमी से खतरा, कंधे-कमर में सूजन, खिंचाव
सिर चकराना, हड्डियां फूलने की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ी
कई मरीजों को पैर में झुनझुनी, कमजोरी, थरथराहट की शिकायत
इलाहाबाद। दो महीने से 100 फीसदी नमी वाले मानसून ने सेहत के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सर्दी, जुकाम के मरीजों की संख्या तो उमस और बारिश के साथ बढ़, घट रही है लेकिन इस मानसून ने मांसपेशियों, हड्डियों को जो चोट दी, वह गंभीर हो चली है। देखने में पूरी तरह फिट, ब्लडप्रेशर सामान्य, हिमोग्लोबिन औसत लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं, अधेड़ों को चक्कर आ रहे हैं। बुजुर्ग तो पहले से परेशान हैं ही। पिछले तीन-चार दिनों में ही कंधे और हाथ में सूजन के कारण बैठे बैठे चक्कर खाकर गिरने के कई मामले डॉक्टरों के पास पहुंचे हैं। पिछले एक हफ्ते से जिला अस्पतालों में और पांच प्रमुख हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास मानसून के साइड इफेक्ट वाले 215 रोगी जांच और इलाज को पहुंचे। उनमें से 45 की हालत इस कदर नाजुक थी कि उन्हें भर्ती करना पड़ा। लगातार सिंकाई, ट्रैक्शन से कुछ की हालत में सुधार दिख रहा है।

भारी बारिश के बाद भी उमस हावी
जुलाई के पहले हफ्ते से अब तक लगातार आर्द्रता 100 फीसदी के आसपास है। सामान्य से दोगुनी बारिश और अति आर्द्रता के बाद भी उमस लगातार हावी रही। जब भी बादल हटे गर्मी ने परेशान किया। तेज धूप और भारी नमी का घालमेल मांसपेशियों के लिए अच्छा नहीं रहा। जमीनी उष्मा मानसून को झटका देती रही। भारी नमी और उष्मा की खींचतान के कारण कंधे, रीढ़ और कमर की मांसपेशियों में इस कदर तनाव बढ़ा कि कुछ मरीज चलने फिरने में असमर्थ हो गए हैं।

नमी से नसों में सूजन
वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.एसपी गुप्ता ने बताया कि उनके पास 20 मरीज हैं जिन्हें कंधे से ऊपर की तरफ जाने वाली नसों में सूजन है और रक्त प्रवाह पर आंशिक असर पड़ रहा है। इसके कारण दिन में एक से दो बार चक्कर आ रहा है और उल्टी की भी शिकायत है। नसों में सूजन का असर यह है कि ऐसे कई मरीज स्पांडिलाइटिस के शिकार हो गए हैं।
बांह, हथेली, उंगलियों तक में ऐंठन

अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.डीके गर्ग ने बताया कि ऐसे मौसम में चक्कर आमतौर पर सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के कारण होता है। गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधे में तकलीफ, बाहों में खिंचाव की शिकायत भी होती है। उनके पास दारागंज निवासी शिक्षक प्राणेश त्रिपाठी, मंजुला सिंह, दिव्यांक मिश्र, राजस्व कर्मचारी अजय कुमार, अल्लापुर निवासी स्वास्थ्यकर्मी अखिलेश श्रीवास्तव इलाज के लिए आते हैं। बताया कि उन सभी को मांसपेशियों में खिंचाव के साथ बांह, हथेलियों और अंगुलियों तक में दिक्कत है।

इलाज न कराया तो गंभीर हो सकती है बीमारी
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ.राकेश चंद्रा के पास ऐसे कई मरीज हैं जिन्हें अंगुलियां हिलाना भी मुश्किल हो रहा है। उनके पास 15 ऐसे मरीज हैं जिनके पैर में झुनझुनी, कमजोरी, थरथराहट की शिकायत है। सॉफ्ट लेजर तकनीक से उनमें से कई को लाभ मिला है। उनका कहना है कि नसों में सूजन, खिंचाव गंभीर मामला है। इसका उचित इलाज न होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

ज्यादा नमी और थोड़ी गर्मी से बढ़ती है परेशानी
दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज सह लोक नायक अस्पताल के मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर डॉ.नरेश गुप्ता का कहना है कि ज्यादा नमी और थोड़ी गर्मी से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। बारिश और गर्मी के मेल से चक्कर, बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है।

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