यूरेनियम से बनेगी 40000 मेगावाट बिजली

Allahabad Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
दो साल में तैयार हाेंगे सात नए न्यूक्लियर प्लांट
12वीं पंचवर्षीय के तहत लगेंगेे इंपोरटेड रिएक्टर
विकिरण की धारणा गलत, करना होगा जागरूक
लोगों के समर्थन से ही मिलेगी राजनीतिक ताकत
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। आने वाले दिनों में परमाणु ऊर्जा से बिजली की जरूरतें पूरी की जाएंगी। बिजली की बढ़ती मांग तथा कोयले के सिमटते भंडार के मद्देनजर परमाणु ऊर्जा विभाग ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना में कई न्यूक्लियर रिएक्टर यूनिट का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे 40 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन का दावा है। इनके अलावा सात यूनिटों पर काम चल रहा है, जो दो साल में बनकर तैयार हो जाएंगे। एचआरआई में सोमवार को आयोजित सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ.रतन के. सिन्हा ने बताया कि इन संयत्रों से 5800 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
डॉ.रतन ने बताया कि परमाणु संयंत्रों से विकिरण को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं, जो गलत है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लोगों के समर्थन से राजनीतिक दबाव भी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि क्वालालंपुर में संयंत्र लगाने का भी मात्र दो गांव के लोग विरोध कर रहे हैं लेकिन उनकी आशंकाओं को भी दूर किया जाएगा। बताया कि ऊर्जा के दूसरे संसाधन सिमटते जा रहे हैं। इसलिए परमाणु ऊर्जा मजबूरी भी है। इसलिए इसे बढ़ावा देना ही होगा। उन्होंने बताया कि यूरेनियम की भी मात्रा सीमित है। इसके अलावा इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना होता है। इसलिए यूरेनियम से निकलने वाले प्लूटोनियम से ऊर्जा बनाने के क्षेत्र में काम चल रहा है। एक संयंत्र भी बनाया जा रहा है। इससे 60 गुना अधिक बिजली मिलेगी। बताया कि इससे दूसरे चरण में बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। इस तकनीकी से 2025 तक 65 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। डॉ.रतन ने बताया कि थोरियम से बिजली उत्पादन की भी एक थ्योरी ढूंढ़ ली गई है। इस पर आगे के शोध के लिए एक एडवांस न्यूक्लीयर रिएक्टर का निर्माणकार्य चल रहा है। तीसरे चरण में 2045 से इस तकनीकी से बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। बताया कि भारत में थोरियम की अधिक मात्रा मिलती है। इसमें सफलता मिल जाती है तो बिजली की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

इलाज, कृषि के क्षेत्र में भी देता है योगदान
परमाणु ऊर्जा विभाग केवल सुरक्षा और बिजली उत्पादन ही नहीं, स्वास्थ्य एवं कृषि के क्षेत्र में भी कई रिसर्च कार्यक्रम चला रहा है। विभाग के सचिव डॉ.रतन के. सिन्हा ने बताया कि आइसोटोप का प्रयोग जांच और कैंसर के इलाज में किया जा रहा है। गामा किरणों से बीज की नई किस्में विकसित की जा रही हैं। विभिन्न फसलों के 45 किस्म के बीज विकसित किए जा चुके हैं।

एचआरआई का होगा विस्तार
योजनाएं सफल हुईं तो एचआरआई में केवल फंडामेंटल फिजिक्स और गणित में ही नहीं, थ्योरेटिकल केमेस्ट्री, बायोलॉजी आदि क्षेत्र में भी रिसर्च होंगे। इसके लिए संस्थान ने फैकेल्टी और कर्मचारियों की भर्ती का प्रस्ताव बनाया है। निदेशक प्रो.जेके भट्टाचार्य ने बताया कि इसके लिए परमाणु ऊर्जा विभाग से भी बात की जा रही है। विभाग के सचिव डॉ.रतन कुमार सिन्हा ने भी हर स्तर पर मदद का आश्वासन दिया।

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