अफसरों के सामने बेबस हुए डीएम, कमिश्नर

Allahabad Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
ढीठ अफसरों से खीजे कमिश्नर ने कहा, अब होगा मुकदमा
कुंभ को कबाड़ बनाने पर तुले अफसरों की जारी है मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। कुंभ के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम हो या पोल शिफ्टिंग, सरकारी विभाग पूरी तरह से बेलगाम हो चुके हैं। यहां तक कि अफसर अब डीएम, कमिश्नर की भी सुनने को तैयार नहीं। डीएम और कमिश्नर एक-एक जगह तीन-तीन बार निरीक्षण कर रहे हैं। खामियां सामने आने पर अफसरों को कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा रही है, अफसरों पर कार्रवाई के लिए शासन को सिफारिश भी भेजी गई है लेकिन पिछले छह माह के दौरान किसी भी अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। ढीठ अफसरों से खीजे कमिश्नर का कहना है कि अब ऐसे लापरवाह अफसरों के खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
शहर में बार-बार सड़कें धंस रही हैं। चौड़ीकरण के लिए सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। सीवर लाइन शुरू होने से पहले ही जवाब देने लगी है। ऐसे में एक ही सड़क को तीन-तीन बार खोदा जा रहा है। सिविल लाइंस का सुभाष चौराहा इसका जीता-जागता उदाहरण है। सिर्फ इतना ही नहीं, बिजली के पोल टेढ़े-मेढ़े लगा दिए गए हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सीवर लाइन बिछाने के बाद सड़क बनाना भूल गया। खराब सड़कें दो दिन में तीन लोगों की मौत का कारण बन चुकी हैं। ऐसी ही तमाम खामियां संकट बनकर पूरे शहर पर मंडरा रही हैं और अफसर अपनी मनमानी पर उतारू हैं। कमिश्नर हर हफ्ते बैठक कर रहे हैं। अफसरों को चेतावनी जारी कर रहे हैं लेकिन अफसरों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। चौफटका से बम्हरौली तक इलाहाबाद-कानपुर रोड पर सीवर लाइन बिछाई गई लेकिन तमाम जगह समतलीकरण का काम अधूरा छोड़ दिया गया। कमिश्नर और डीएम ने अलग-अलग दो बार इस सड़क का निरीक्षण किया। लापरवाही पर अफसरों को फटकार लगाई और कार्रवाई की चेतावनी भी दी लेकिन अफसरों ने उनके निर्देश को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। कुंभ से जुड़े अन्य कार्यों में भी खामियां उजागर होने के बावजूद कमिश्नर और डीएम की कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित रह गई।
अफसरों को आखिर कौन दे रहा संरक्षण
0 शहर के जो हालात है, उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि कुंभ 2012-13 अपनी बदइंतजामी और घपलों-घोटालों के लिए भी जाना जाएगा। कुंभ से जुड़े कार्यों से लगातार खिलवाड़ जारी है। आम आदमी के लिए सड़क पर चलना दुश्वार हो गया है। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? इन अफसरों को किसका संरक्षण प्राप्त है? डीएम और कमिश्नर की सिफारिश को क्यों अनसुना किया जा रहा है? कहीं लखनऊ में बैठे इन विभागों के मुखिया और मंत्री तो अफसरों को नहीं बचा रहे? इन तमाम सवालों ने विभागों की कार्यप्रणाली का संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।
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‘मानता हूं कि एक खामी दूर करने के बाद दूसरी खामी सामने आ जाती है। विभाग निरंकुश हो चुके हैं। कई अफसरों के खिलाफ निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। कार्रवाई शासन स्तर से होनी है। अब और इंतजार करना ठीक नहीं। अगर अफसर अब भी नहीं माने तो अब सीधे उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। स्थानीय स्तर पर कम से कम यह कार्रवाई तो की जा सकती है।’
देवेश चतुर्वेदी, कमिश्नर
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‘लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। चेतावनी दी जा रही है। कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजा गया है। कार्रवाई अब शासन को करनी है। खामियों के लिए सीधे विभागीय अफसर जिम्मेदार हैं। जिला प्रशासन अपने स्तर से सुधार की पूरी कोशिश कर रहा है।’
अनिल कुमार, डीएम

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