जिस गांव में उपकेंद्र वहीं जल रही ढिबरी

Allahabad Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
बारा। चिराग तले अंधेरा का शायद ही इससे बेहतर उदाहरण मिले। तहसील मुख्यालय बारा खास का गांव जियाराम का पूरा के लोग अब तक अंधेरे में जीवन गुजार रहे हैं। ताज्जुब यह कि इसी गांव में उपकेंद्र लगा है जहां से दर्जनों गांवों को बिजली सप्लाई होती है लेकिन उपकेंद्र वाले गांव में कनेक्शन नहीं है। इससे भी अधिक हैरान करने वाली बात है कि जेई को पता ही नहीं कि गांव में बिजली कनेक्शन नहीं है। उपकेंद्र वाले गांव में ढिबरी जल रही है और जिम्मेदार अधिकारी को इसकी भनक नहीं है। बारा मुख्यालय में एसडीएम समेत कई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं, उसके बाद भी गांव में अंधेरा, यह बताने के लिए काफी है कि विभाग ग्रामीणों की समस्या को लेकर कितने चिंतित है। बारा की गिनती यमुनापार के विकसित क्षेत्रों में की जाती है। तहसील मुख्यालय के कारण वहां रविवार छोड़ रोज बड़ी संख्या में लोग अपना काम लेकर पहुंचते हैं। तमाम दुकानें खुल गई हैं। अधिकारी रोज सात-आठ घंटे वहां जमे रहते हैं, लेकिन मुख्यालय के गांव पर किसी की नजर न जाना हैरानी भरा है। तहसील मुख्यालय बारा खास के जियाराम का पूरा गांव में विकास के नाम पर केवल उपकेंद्र का भवन है। इस विकास का लाभ दूसरे गांवों को मिल रहा लेकिन इस गांव की महिलाएं अंधेरे में ही खाना पकाती हैं, बच्चे ढिबरी में ही पढ़ाई कर रहे हैं। प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों ने थोड़ा भी ध्यान दिया होता तो गांव का अंधेरा दूर हो सकता है। एक हजार परिवार वाले इस गांव को दो दफे अंबेडकर गांव चुना गया। अंबेदकर गांव में कई विकास कार्य होने थे लेकिन हुआ कुछ नहीं। गांव के मनोज कुमार विश्वकर्मा, रामसिंह, सुरेश कुमार, हीरा लाल, लल्लन सिंह, राम कैलाश बिंद, अवधेश विश्वकर्मा, सूर्यबली, त्रिभुवन पटेल, मंगलाप्रसाद, सुशीला देवी, मलखान आदि ने बताया कि इस गांव को अंबेदकर गांव होने का लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की थी लेकिन हुआ कुछ नहीं। लाल किले से प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि हर गांव तक बिजली पहुंच गई है, बस कनेक्शन देना बाकी है लेकिन शायद उन्हें नहीं पता कि जब तहसील मुख्यालय का ही गांव अंधेरे में है तो बाकी का क्या होगा। तहसील मुख्यालय में रह रहे लोग मोबाइल या बल्ब जलाने के लिए उधार पर बाजार से बैटरी लाते हैं। गांव में तीन सौ से अधिक मोबाइल हैं, लेकिन सबको परेशानी उठानी पड़ती है। युवा या किसान किसी काम से कस्बे या दूसरे गांव जाते हैं तो वहीं मोबाइल चार्ज करने की मिन्नत करते हैं। ‘गांव में विद्युतीकरण के लिए कई बार अधिकारियों को आवेदन दिया। खुद जाकर बड़े अफसरों से मिली लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।’ अनीता जायसवाल, प्रधान। ‘जानकारी नहीं है। अगर गांव में विद्युतीकरण नहीं हो सका है तो सर्वे कराकर शासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा।’ शिवप्रसाद, जेई

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