आजादी के परवानों के गांव में भी अंधेरा

Allahabad Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
अमर उजाला मुहिम, अंधेर के खिलाफ
शंकरगढ़ के बांसी ग्रामसभा के 12 गांवों में नहीं है बिजली
गांव में है काफी पुराना इंटर कालेज, निकले कई मेधावी लेकिन रोशनी नहीं मिली
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। डेढ़ हजार से अधिक परिवार है गांव में, पांच स्वतंत्रता सेनानी रह चुके हैं, जिनका नाम आसपास के जिलों में भी है, आजादी के साथ शिक्षा की रोशनी फैलाई, दुर्गम पथरीले पहाड़ पर इंटर कालेज खुलवाया लेकिन गांव का अंधेरा दूर नहीं कर सके। शंकरगढ़ के बांसी ग्रामसभा में डेढ़ हजार से अधिक परिवार पूरी आजारी से जीवन गुजार रहे हैं लेकिन अंधेरे ने उनके विकास का रास्ता रोक रखा है। गांव में स्कूल है, सभी परिवारों के कुछ सदस्य नियमित मजदूरी ही सही, रोजगार से जुड़े हैं लेकिन रोशनी नसीब नहीं है। गांव के पढ़े लिखे लोगों ने कई दफे बिजली कनेक्शन के लिए कोशिश की, अधिकारियों को लिखा, विधायक, सांसद से मुलाकात की लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
दस बरस में एक किमी नहीं पहुंच पा रहे खंभे
बांसी ग्रामसभा में 13 गांव हैं। एक मुख्य बस्ती को छोड़ शेष 12 गांवों में बिजली नहीं है। मुख्य बस्ती में दस बरस पहले बिजली आ गई लेकिन एक किलोमीटर के दायरे में बसे इस ग्रामसभा के दूसरे गांवों में अंधेरा दूर नहीं हो सका। इन्हीं 12 गांवों में से एक रूम के रामआसरे पाल, दिग्विजय पटेल का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के तौर पर काफी जाना जाता है। उनके प्रयासों से गांव में इंटर कालेज खुला। कालेज में आसपास के अन्य विद्यालयों की तुलना में अच्छी पढ़ाई होती है। स्कूल के शिक्षक, मेधावी छात्रों ने भी बिजली के लिए बहुत कोशिशें की लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। गांव से एक किलोमीटर पहले ही कनेक्शन का काम क्यों ठप हो गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं। अधिकारी कह रहे हैं कि गांव में विद्युतीकरण की फाइल स्वीकृत ही नहीं हुई।
मोबाइल चार्ज करने तीन किलोमीटर जाते हैं गांव वाले
गांव के लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए तीन किलोमीटर दूसरे गांव जाते हैं। बांसी मुख्य बस्ती में बिजली है लेकिन वहां लोग दूसरे गांव के लोगों को पास नहीं फटकने देते। गांव के अवधेश चंद्र, लाल बहादुर, जवाहर ने बताया कि लोग डरते हैं कि सबके मोबाइल चार्ज किए तो ज्यादा बिल आएगा और उनके भी कनेक्शन कट जाएंगे। समरजीत यादव, बाबूलाल, छेदीलाल, रामप्रसाद, जमुना पाल का कहना है कि सबने बिजली के लिए कई दफे धरना प्रदर्शन किया, सांसद, विधायक पर दबाव बनाया लेकिन बिजली नहीं आई।
ढिबरी में पढ़ाई करने वाले युवा नेताओं से नाराज
गांव के दो हजार से अधिक बच्चे, किशोर, युवा हैं जो पढ़ाई कर रहे हैं। कई मेधावी छात्र हैं लेकिन ढिबरी में पढ़ाई ने परेशान कर रखा है। छात्र उन नेताओं से खासे नाराज हैं, जो वोट मांगने पहुंचते हैं लेकिन बिजली नहीं जुड़वा सके। दसवीं, बारहवीं के छात्र सुशील, दिवाकर, रश्मि, प्रियंका, राधेश्याम, जयकिशन, राघवेंद्र, किरन, सुलेखा का कहना है कि केवल वोट के समय दिखने वाले सभी नेताओं का बहिष्कार किया जाएगा। ऐसे नेताओं के समर्थकों का भी विरोध होगा।
‘जबसे दुल्हन बनकर आई तभी से बिजली को लेकर कई तरह से कोशिशें की, अधिकारियों को भी पत्र लिखे लेकिन लगता नहृीं कि गांव में बिजली आ सकेगी। नए सिरे से कनेक्शन के लिए कोशिश करेंगे। फूलकली देवी, ग्राम प्रधान

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