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अल्टीमेटम के बाद भी खामियां, अफसर भड़के

Allahabad Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। चिल्ड्रेन हॉस्पिटल और एसआरएन अस्पताल में मासूम बच्चों के इलाज में लापरवाही और बदइंतजामी को उजागर करने वाली ‘अमर उजाला’ की खबर का खासा असर दिख रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर तत्काल सुधार के आदेश दिए और अफसरों से जवाब तलब किया। मामले में बुधवार को अधिकारियों को न्यायालय के सामने उपस्थित होकर जवाब देना है। इसी के मद्देनजर चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव जेपी शर्मा और महानिदेशक डॉ.सौदान सिंह ने मंगलवार को दोनों अस्पतालों का निरीक्षण किया। तेजी से सुधार के लिए तमाम चेतावनी और अल्टीमेटम के बाद भी उन्हें ढेरों खामियां देखने को मिलीं तो वह भड़क उठे। ‘अमर उजाला’ की पहल के बाद बीमार बच्चों के इलाज में सहूलियत और राहत के लिए प्रमुख सचिव ने सख्त फैसले किए। चिल्ड्रेन में नए और पुराने सभी निर्माणाधीन काम एक हफ्ते में पूरा करने को कहा। उन्होंने ढीले काम और लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की। चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव जेपी शर्मा शाम लगभग 4.17 बजे चिल्ड्रेन हॉस्पिटल पहुंचे। महानिदेशक डॉ.सौदान सिंह और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह भी साथ थे। निर्माणाधीन ओपीडी तीन और उसके बगल में सी कन्सल्टेंट का कक्ष देखकर प्रमुख सचिव भड़क गए। उन्होंने अस्पताल में मरम्मत और निर्माण के काम करा रहे जल निगम के सीएंडडीएस के जेई को फटकार लगाई। उससे पूछताछ शुरू कर दी। कब से चल रहा काम? कितना समय लगेगा? क्यों नहीं हो सका अब तक पूरा? प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह और विभागाध्यक्ष डॉ.पीसी मिश्र भी जेई के साथ जवाब देते जा रहे थे। जेई ने इसी माह काम पूरा करने की बात कही। प्रमुख सचिव नए ढंग से तैयार ऑपरेशन थिएटर में पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि ओटी बन गया तो है पर उसमें सर्जरी शुरू होने में अभी कुछ दिन और लग जाएंगे। इस पर वह नाराज हो गए। बोले-कई महीने से बीमार बच्चों को ऑपरेशन के लिए भटकाया जा रहा था। और कितने दिन चलेगा यह सब? तीन दिन के अल्टीमेटम में क्या हुआ? प्रमुख सचिव के इस तेवर से सबकी घिग्गी बंध गई। प्राचार्य ने भरोसा दिया कि दिल्ली से एनओसी मिलने पर तीन दिन में ओटी में सर्जरी होने लगेगी। फिर प्रमुख सचिव ने एक नंबर इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया जिसमें कई माह से काम चल रहा है। प्राचार्य ने कहा कि जेई ने 10 रोज में काम पूरा करने को कहा था मगर हुआ नहीं। प्रमुख सचिव का गुस्सा देखते हुए जेई ने कहा कि इमरजेंसी वार्ड को अगले छह रोज के भीतर पूरी तरह बना दिया जाएगा। प्रमुख सचिव ने एनआरसी समेत दूसरे तीन वार्ड का भी निरीक्षण किया। वह दूसरे तल पर एनआईसीयू और जनरल वार्ड भी गए। फिर नए बन रहे वार्ड को भी देखा। उन्होंने इस वार्ड को तैयार करने के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की। फिजियोथेरेपी वार्ड, एक्सरे रूम देखने के बाद प्रमुख सचिव ने जोर देकर कहा कि चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में बच्चों के इलाज में जरा भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। दोनों इमरजेंसी वार्ड में पर्याप्त एसी लगने चाहिए। दवाएं देने और भर्ती करने में जरा भी चूक नहीं होनी चाहिए। स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भी बीमार बच्चों के इलाज की खातिर एनआईसीयू बनाया जाएगा। अमर उजाला ने पिछले दिनों इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। मेडिकल कॉलेज से जुड़े इस अस्पताल में जच्चा-बच्चा वार्ड है, गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है, लेकिन बच्चे बीमार पड़े तो इलाज के लिए बाल चिकित्सक की तैनाती नहीं है। बीमार बच्चों को चिल्ड्रेन हॉस्पिटल भेज दिया जाता है। नवजात शिशु को दूसरे अस्पताल तक ले जाने पर और बीमार होने का खतरा रहता है। ऐसे में कई बार बच्चों की हालत बिगड़ भी चुकी है। अमर उजाला में ‘जन्म लेते ही जिंदगी से जंग’ शीर्षक खबर छपने पर हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, महानिदेशक, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को चार जुलाई को तलब किया तो खलबली मची। पेशी से पहले मंगलवार को प्रमुख सचिव ने एसआरएन अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने वार्ड नंबर एक, दो, 13 और 14 को देखा। फिर स्पेशल प्राइवेट वार्ड का भी जायजा लिया। उन्होंने दूसरे वार्ड भी देखे। नवीनीकरण का काम जल्द पूरा करने को कहा। आखिर में उन्होंने प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह से कहा कि एसआरएन में भी एनआईसीयू बनाया जाना चाहिए। यहां जन्मे बच्चों को इलाज केलिए दूसरे चिकित्सालय में भेजना ठीक नही है। इसके लिए वह प्रस्ताव बनाकर भेजें। चिल्ड्रेन के निरीक्षण के बाद शाम लगभग सवा पांच बजे प्रमुख सचिव एसआरएन हॉस्पिटल के वार्ड नंबर दो के अंदर गए तो बिजली गुल थी। अंदर अंधेरा था। मरीज उमस में कसमसा रहे थे। यह देख प्राचार्य के साथ ही एसआईसी डॉ.श्रद्धा द्विवेदी भी बौखला गईं। उन्होंने मोबाइल पर नंबर मिलाया और थोड़ा हटकर चिल्ला पड़ीं-कैसे कटी है बिजली? सब नप जाओगे। एसआईसी के हड़काने के कुछ मिनट बाद बिजली आ गई। एसआरएन हॉस्पिटल के निरीक्षण के बाद प्रमुख सचिव और महानिदेशक ने प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह के चैम्बर में मीटिंग की। इस दौरान दवाओं का मुद्दा उठने पर प्रमुख सचिव भड़क उठे। उन्होंने सर्जरी और आर्थो के एचओडी समेत दूसरे सीनियर डॉक्टरों को भी फटकारते हुए कहा कि वे मरीजों को ऐसी दवाएं लिखते हैं जो अस्पताल में मिलती ही नहीं। ‘मैं देखने आया हूं कि हॉस्पिटल में सभी व्यवस्था सही ढंग से है कि नहीं? पिछले साल 197 लाख का बजट मिलने के बाद अब तक चिल्ड्रेन में ओटी, इमरजेंसी समेत दूसरे वार्ड में काम अधूरा है। मैंने 31 जुलाई तक का वक्त दिया है। फिर कार्यदायी संस्था पर भी कार्रवाई होगी। दोनों इमरजेंसी वार्ड में भर्ती बच्चों को राहत पहुंचाने के लिए एसी चालू रखने को कहा है। एसआरएन अस्पताल में भी बच्चों के लिए एनआईसीयू बनाया जाएगा। अगर डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठते तो औचक निरीक्षण में पकड़ा जाएगा।’0जेपी शर्मा, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा
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