सेवादारों के सहारे गंगा भी कर देंगे निर्मल

Allahabad Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
अमर उजाला विशेष- गंगा सफाई कारसेवा पर संत सीचवाल से सीधी बात
संत सीचवाल बोले - संकल्प, सेवा से हुई बेई की सफाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। ‘सिर्फ सच्चे मन से संकल्प और पवित्र भावना की जरूरत है, फिर कुछ भी मुश्किल नहीं। कोई काम कहने नहीं करने से होता है। हौसला होना चाहिए तो कुदरत भी साथ देती है। प्रयाग में भी कारसेवा के लिए समर्पित सेवादार मिल जाएं तो बेन की तर्ज पर गंगा की स्थिति बेहतर हो सकती है।’
यह कहना है कि जालंधर के संत बलवीर सिंह सीचवाल का, जिन्होंने कारसेवा से पंजाब की पवित्र बेई नदी को पुनर्जीवन दिया। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में गंगा की निर्मलता का संकल्प दोहराते हुए बोले, कुंभ मेले के दौरान निर्मल गंगा के लिए पूरे क्षेत्र के निरीक्षण और भगतों से विमर्श के बाद कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जैसे बेई के लिए गुरुनानक पातशाह ने आशीष दिया, वैसे प्रयाग का संकल्प गंगा मइया पूरा करेंगी।
बेई के प्रयासों की चर्चा करते हुए बोले, एक दिन संत चर्चा में बात उठी कि बेई प्रदूषित ही नहीं सूख भी रही है, ऐसे में हमारी आने वाली पीढ़ी इतिहास, संस्कृति को नष्ट करने का दोष देगी। फिर क्या बेई की सफाई का संकल्प लिया गया और तकरीबन 165 किलोमीटर लंबी बेई की सफाई में छात्रों, माताओं, बहनों, बुजुर्गों, कारोबारियों, किसानों, भगतों ने उसकी दशा बदल दी। जहां-जहां से नदी गुजरी है, उन गांवों के लोगों ने कारसेवा में भागीदारी की।
ड्रेजिंग करके निकाली गई सिल्ट को वापस खेतों में डाल दिया गया। नदी को गहरा और चौड़ा किया गया। बेई में मिलने वाले प्रदूषित पानी को प्राकृतिक तरीके से शोधित करके अंडरग्राउंड पाइपों के माध्यम से आसपास के तकरीबन आठ किलोमीटर क्षेत्र के खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया गया। अब सफाई के बाद रिचार्जिंग सिस्टम दोबारा काम करने लगा और आमतौर पर सूखी रहने वाली बेई में गर्मियों में भी जल बना रहने लगा है।
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0 बेन की तरह गंगा भी पवित्र
कहते हैं, अहियापुर स्थित गुरुद्वारा पक्की संगत में जब गुरु तेगबहादुर जी माता नानकी के साथ आकर रुके और माता नानकी ने गंगा स्नान की इच्छा जाहिर की तो गुरु तेगबहादुर जी ने पक्की संगत के कुंए में ही गंगा को प्रवेश करा दिया था ताकि माता नानकी गंगा स्नान कर सकें। बेई की तरह ही गंगा भी सिख समुदाय के लिए पवित्र हैं।
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‘गुरुनानक देव जी ने पंजाब की बेई नदी में डुबकी लगाई थी और उसमें से तीसरे दिन निकलने पर उन्होंने मूलमंत्र, गुरुमंत्र, ‘एक ओंकार सतनाम’ का उच्चारण किया था। इसीलिए सिख समुदाय के लिए बेई पवित्र है। इसी तरह संत सीचवाल जी को गंगा की सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए भगतों और समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग लिया जाएगा।’
0 महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री
निर्मल पंचायती अखाड़ा

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