आईएमए के आवाहन पर बंद रहे निजी अस्पताल

Allahabad Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 09:11 PM IST
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बंद रहे निजी अस्पताल, क्लीनिकों पर ताला, भटके मरीज
- आईएमए के आवाहन पर डॉक्टरों की हड़ताल, सरकारी अस्पतालों में भीड़
- दिल्ली गए डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने जंतर मंतर पर जताया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल के मद्देनजर मंगलवार को निजी डाक्टरों ने कामकाज बंद रखा। डॉक्टर क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने का विरोध कर रहे हैं। नर्सिंग होम में मरीज नहीं देखे गए। क्लीनिकों पर ताला लगा रहा। निजी पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी, एमआरआई, एक्सरे और इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित रहीं, जिससे लागों को परेशानी का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों के इस विरोध से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी।
नर्सिंगहोम एसोसिएशन और डेंटल एसोसिएशन भी विरोध में शामिल रहा। निजी अस्पतालों में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक न मरीज देखे गए और न ही किसी तरह की जांच हुई। परेशान मरीजों ने इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर रुख किया। एसआरएन, बेली, चिल्ड्रेन, कॉल्विन अस्पतालों की ओपीडी में अन्य दिनों की अपेक्षा काफी भीड़ रही। एसआरएन अस्पताल के आईसीयू फुल रहे और मेडिसिन की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। बेली के रेडियोलॉजी विभाग में भी अन्य दिनों की अपेक्षा काफी भीड़ रही।
एएमए के सभागार में सभाकर पदाधिकारियों व सदस्यों ने केंद्र सरकार के क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने पर विरोध जताया। डॉक्टरों ने इस अधिनियम से उत्पन्न होने वाली समस्याओं एवं परिस्थितियों पर चर्चा भी की। सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रेसीडेंट इलेक्ट डॉ. अनिल शुक्ला ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में देश भर में एएमए की 30 प्रादेशिक और 1700 स्थानीय शाखाओं के हजारों चिकित्सक शामिल रहे। यहां से डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. त्रिभुवन सिंह के नेतृत्व में दिल्ली गए चिकित्सकों ने प्रदर्शन में शामिल होकर एएमए के 19 सूत्रीय मांग पर अपनी सहमति जताई। संचालन डॉ. राजेश मौर्या ने किया।
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एएमए की डॉक्टरों के लिए प्रमुख मांगें
1. स्वास्थ्य विभाग के कानूनों को एक समान केंद्रीय कानून के अंतर्गत लाया जाए।
2. मेडिकल लापरवाही चिकित्सकों के खिलाफ मुकदमा चलाने के संबंध में एमसीआई के परामर्श से स्वास्थ्य मंत्रालय समयबद्ध संरचना तैयार करे।
3. लिपिकीय त्रुटियों और प्रशासनिक कमी पर डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमे चलाने को कानून के दायरे से बाहर रखना चाहिए।
4. डॉक्टरों एवं अस्पताल में हिंसा के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान हो।
5. पश्चिम बंगाल के क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट को संशोधित किया जाए।
6. उपभोक्ता कानून के अंतर्गत मुआवजा का उचित निर्धारण हो, उसका निर्धारण रोगी की आमदनी के हिसाब से ना हो।
7. एक दवा-एक कं पनी का कानून बनाया जाए, जिससे कि दवा की कीमत पूरे देश में एक समान हो।
8. चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण के लिए एकल खिड़की का प्रावधान किया जाय।
10. माह में एक बार एएमए के केंद्रीय पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य सचिव की बैठक हो।

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