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सरकारी भूमि पर मकान बनाने वाले 15 लोगों को नोटिस

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Thu, 13 Sep 2018 12:57 AM IST
सरकारी भूमि पर मकान बनाने वाले 15 लोगों को नोटिस
सरकारी भूमि पर मकान बनाने वाले 15 लोगों को नोटिस - फोटो : Dig Vishal
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सरकारी भूमि पर बने छर्रा अड्डे को तोड़ने के बाद प्रशासन ने उसके आसपास के इलाके में मकान बनाकर रह रहे 15 मकान स्वामियों को नोटिस जारी किये हैं। उन्हें सात दिन के अंदर मकान खाली करने का आदेश दिया गया है। जबकि आरोपी भवन स्वामी अपने मकानों को वक्फ बोर्ड की भूमि में बताकर किरायेनामे की रसीद को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए अपने को निर्दोष ठहराने में जुटे हैं और हाईकोर्ट की शरण लेने की
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तैयारी में हैं। हालांकि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का कहना है कि हमने वक्फ की जमीन को छुआ तक नहीं है, जो भी कब्जा हटाया गया है या भवन स्वामियों को नोटिस दिये गए थे, वे सरकारी भूमि पर बने हैं। उन सभी को हर सूरत में हटाया जाएगा। 

तहसील कोल व नगर निगम की टीम ने मंगलवार को करीब 72 करोड़ की 14 बीघा सरकारी भूमि पर बने छर्रा बस अड्डे के साथ एक पेट्रोल पंप, कई दुकान एवं अस्थाई निर्माणों को ढहा दिया था। इनमें से तीन दुकानों के स्वामियों का आरोप था कि हमारी दुकानें वक्फ की संपत्ति हैं और प्रशासन ने इन्हें गलत तरीके से तोड़ा है। हालांकि प्रशासन उनके दावों को गलत ठहरा रहा है।

कार्रवाई के दौरान करीब 15 ऐसे मकान चिन्हित किये गए थे, जो सरकारी भूमि पर बने पाए गए। नगर निगम ने इन सभी को बुधवार को नोटिस जारी कर दिये। छर्रा अड्डा पर बने पेट्रोल पंप के बाहर दीवार खड़ी करा दी गई है। 

क्या कहते हैं पीड़ित 
मंगलवार शाम को एक दरोगा जी हमसे मकान खाली करने के लिए कह गए हैं। कहा कि अगर खाली नहीं किया तो मौजूदा हालात में मकान तोड़ देंगे। मकान के बिना हमारे पास कुछ नहीं है। सड़क पर आ गए तो हम कहां जाएंगे। 
- मुकेश

प्रशासन ने हमारी टाल को तोड़ दिया है। अब दो कमरों में तीन परिवार गुजर बसर कर रहा है। मेरे तीनों बच्चे मेहनत मजदूरी कर परिवार को पालते थे। टाल के टूटने से कारोबार ठप हो गया है। इस आर्थिक संकट से जल्द नहीं उबर पाएंगे। 
- कर्पूरी देवी

जब से हमें मकान तोड़ने की कहा है, रातों की नींद उड़ गई है। इस मकान के बाद हमारे पास सर ढकने के लिए कोई जगह नहीं है। वहीं मेहनत मजदूरी कर जो परिवार चलता है। मकान टूटने के बाद खाने के लाले पड़ जाएंगे। 
- रामश्री देवी

हम इस जमीन पर विगत कई सालों से रह रहे हैं। वक्फ बोर्ड को किराया भी समय पर देते हैं। परिवार मेहनत मजदूरी करता है। मकान के बाद रहने के लिए नई छत बनाना असंभव है। प्रशासन को हमारे बारे में भी सोचना चाहिए। 
- सुशीला 

गलती वक्फ की और खामियाजा भुगत रहे अन्य लोग 
भवन स्वामियों को नोटिस मामले की तह तक जाएं तो गलती साफतौर पर वक्फ बोर्ड की नजर आ रही है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ने बताया कि पहले तो कब्रिस्तान की भूमि में कोई निर्माण हो ही नहीं सकता। हुआ यह है कि वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति के साथ सरकारी भूमि पर भी लोगोें को किराये पर जमीन दे दी थी। अपनी गलती को वैध रूप प्रदान करने के लिए बाकायदा किरायानामा भी जारी किया गया और इसी के आधार पर वर्षों से लोगों से किराया वसूला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी भूमि का कोई भी संस्था अथवा व्यक्ति किराया कैसे ले सकता है। इन सभी व्यक्तियों को नोटिस दिये गए हैं और संतोषजनक जवाब न मिलने पर इनके मकान टूटने तय हैं। 

हाईकोर्ट से भी निजात मिलनी मुश्किल 
प्रशासन के नोटिसों के बाद भले ही मकान स्वामी हाईकोर्ट जाने की बात कह रहे हों, लेकिन वहां भी उन्हें राहत मिलनी मुश्किल नजर आ रही है। दरअसल अतिक्रमणकारियों के हाईकोर्ट जाकर स्टे ले लेने के पैतरे से निपटने के लिए प्रशासन ने पहले ही इंतजाम कर रखे हैं। नगर आयुक्त ने इस मामले में हाईकोर्ट में केबियेट डाल दिया है। इस केबियेट के आगे अतिक्रमणकारियों की कोई भी दलील स्वीकार हो पाएगी, इसमें संदेह ही है। 

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