बापू के कदम पड़े थे एएमयू की जमीं पर

Aligarh Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़ (ब्यूरो)। अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कदम सर सैयद की महान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पड़े तो वह तारीख इतिहास का हिस्सा बन गई। 25 अक्तूबर, 1920 को महात्मा गांधी एएमयू आए और यहां पर स्टूडेंट यूनियन हॉल में भी पहुंचे। उसी दिन महात्मा गांधी को छात्र संघ की आजीवन सदस्यता प्रदान की गई। बाबू अजीवन सदस्यता प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति थे। 1920 में खिलाफत आंदोलन की शुरुआत कर दी गई थी लेकिन उसका प्रभाव नगण्य दिखाई दे रहा था। ऐसे में महात्मा गांधी अलीगढ़ में अपने बेहद करीबी अब्दुल मजीद ख्वाजा के यहां पर आए। उनके साथ एक दर्जन राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े नेता भी थे। सभी लोग अब्दुल मजीद ख्वाजा की कोठी (वर्तमान में एएमयू का यूजीसी एकेडमिक स्टाफ कॉलेज) में ठहरे। इतिहास के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि महात्मा गांधी के साथ मौलाना मो. अली और मौलाना शौकत अली भी थे। स्वदेशी आंदोलन की भी सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी। खिलाफत आंदोलन को धार देने के क्रम में मौलाना अली और शौकत महात्मा गांधी को एएमयू के स्टूडेंट यूनियन हॉल में ले गए। वहां पर महात्मा गांधी के संबोधन का छात्रों पर गहरा प्रभाव पड़ा। छात्र संघ ने सम्मान स्वरूप गांधी को अजीवन सदस्यता प्रदान की और अपना संरक्षक माना।

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