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बरला में दोहराया गया 13 साल पुराना इतिहास

Aligarh Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। बरला में फिर पिक्चर रिवाइंड हुई है। बस सीन थोड़ा सा बदला हुआ है। उस वक्त रामलीला में बरला के प्रधान पर हमला होना था। मगर बम प्रधान पर लगने के बजाय एसओ राम सिंह राजपूत पर लगा था और इस हमले में तत्कालीन एसओ की मौत हो गई थी। इस बार भी सीन कुछ ऐसा ही बन पड़ा है। बदमाशों ने कार्यवाहक एसओ को राहगीर समझ बाइक रुकवाई। जब वर्दी देखी तो बदमाश पकड़े जाने के भय से कार्यवाहक एसओ को गोली मारकर मौत के घाट उतार गए।
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घटना प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी

नहीं मिला मौका, मोबाइल की बैटरी ले गए
अलीगढ़। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए होमगार्ड नेम सिंह ने बताया कि सोमवार शाम करीब सवा सात बजे कार्यवाहक एसओ ओमवीर सिंह उसे यह कहकर अपने साथ बाइक पर लेकर चले कि चलो गाजीपुर तक गश्त कर आएं। वह अपनी रायफल लेकर पीछे बैठ गया, जबकि ओमवीर सिंह के होलस्टर में सरकारी पिस्टल लगी थी। घटनास्थल पर पहुंचे तो टीकरी-बरला के मध्य पड़ने वाले बाग में से अचानक आधा दर्जन लोग निकल आए, जो सभी कच्छा-बनियान पहने थे और सबसे पहले बाइक को डंडा मारकर गिरा दिया। इसके बाद वे डंडों से ही मारपीट करने लगे। इस पर न दरोगा जी को और न उसे हथियार चलाने का मौका मिला। मगर जैसे ही उन्होंने टॉर्च आदि से देखा तो वर्दी देखकर उनके होश उड़ गए और बिना कुछ सोचे समझे उन्होंने दरोगाजी के दो गोलियां मार दीं। सब कुछ पलक झपकते हुआ। जाते-जाते वे उसकी राफयल के अलावा दरोगाजी के मोबाइल की बैटरी निकाल ले गए। इस दौरान चीखपुकार मची तो पास के एक नलकूप पर मौजूद किसान ने अपने गांव टीकरी और बरला थाने पर सूचना दी। तब पुलिस और ग्रामीण आए।
लूट के लिए कुख्यात है यह मार्ग
- डेढ़ माह पहले इसी प्वाइंट पर टीकरी के एक युवक से लूट हुई थी।
- 15 दिन पहले खिटकारी पर सात लोगों को बंधक बनाकर लूटा गया था।
- एक माह पहले मोड़ल के पास तीन लोगों को भी लूटा गया था।
- परौरा के पास भी इसी तरह बदमाशों ने दिया था एक लूट को अंजाम।

सोरों ड्यूटी में गए थे एसओ बरला
एसओ बरला के पद पर सब इंस्पेक्टर राजकमल की तैनाती है, जो सोरों गंगाघाट पर आयोजित अमावस्या मेले में ड्यूटी पर गए थे। वे 14 की शाम को ही चार्ज ओमवीर सिंह को देकर गए थे। उन्हें जब इस घटना की खबर लगी तो वे तत्काल वहां से लौट लिए।

दो साल से बरला में तैनात थे ओमवीर सिंह
विशेष श्रेणी दरोगा ओमवीर सिंह मथुरा से यहां स्थानांतरित होकर आए थे। करीब ढाई साल पहले वे यहां आए थे। इससे पहले वे गोंडा में तैनात रहे हैं, जबकि दो साल से बरला में ही उनकी तैनाती रही। इस घटना की खबर उनके परिवार को दे दी गई।

जिले में सातवें दरोगा का मर्डर
पुलिस के पुराने रिकार्ड पर गौर करें तो जिले में यह एसओ पद पर तैनात सातवें दरोगा की हत्या है। सबसे पुरानी घटना सासनी गेट थाने के सौंगर नाम के एसओ की हत्या मानी जाती है। उस समय वे बदमाशों का पीछा कर रहे थे और बम फेंककर उनकी हत्या की गई। 1994 में गभाना एसओ शरद कुमार यादव की अतिक्रमणकारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके आरोपी बाद में कोर्ट से बरी हो गए। 1999 में बरला एसओ राम सिंह राजपूत की हत्या बम फेंककर की गई थी। इसमें एक आरोपी आज भी जेल में है, जबकि दूसरा छूट गया है। इसके अलावा दो अन्य एसओ की भी जिले में हत्या हुई है, जबकि जीआरपी अलीगढ़ में तैनात एक दरोगा कृष्ण कुमार की 2000 के दशक में आगरा साक्ष्य में जाते वक्त मडराक क्षेत्र में ब्रह्मनपुरी के पास चाकुओं से गोदकर हत्या की गई थी।
शासन गंभीर, अफसरों के माथे पर पसीना
इस घटना की खबर पर एक तरफ जहां एसपीआरए बलिकरन सिंह यादव मौके की ओर दौड़ पड़े, वहीं डीआईजी प्रकाश डी मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। इसके अलावा एसएसपी पीयूष मोर्डिया, एसपी सिटी दयाशंकर मिश्रा, एएसपी पवन कुमार भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। शासन के अफसरों ने वरिष्ठ अधिकारियों से पल-पल की खबर ली। शासन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों के माथे पर पसीना साफ दिखाई दे रहा था। डीआईजी खुद इस मसले को डील कर रहे थे। एसओजी के अलावा बरला के आसपास के थानों की टीम को इलाके में कांबिंग में लगा दिया गया।

कोई कुख्यात नहीं, अहेरिया बिरादरी पर शक
इस इलाके में किसी कुख्यात लुटेरे की सक्रियता तो आज तक पुलिस के संज्ञान में नहीं है, बल्कि इतना जरूर है कि इस इलाके के कई गांवों में अहेरिया जाति के लोग जरूर रहते हैं। पिछले कुछ समय से हो रही लूटपाट और सोमवार की इस घटना को लेकर पुलिस इस बिरादरी के अलावा इस इलाके में अब तक सक्रिय रहे लुटेरों को चिह्नित करने का काम कर रही है।
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