समझ लो..मैंने टोपी पहन रखी है

Aligarh Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़। एएमयू में कार्यक्रमों में परंपरागत रूप से संबोधन के दौरान टोपी पहनने की डिमांड उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी के कार्यक्रम में भी दिखाई दी। सोमवार को एएमयू के कैनेडी हॉल में हुए कार्यक्रम में जैसे ही डॉ. हामिद अंसारी संबोधन को आए तो छात्रों ने टोपी-टोपी की आवाजें लगानी शुरू कर दीं। एएमयू के इस अंदाज से अच्छी तरह वाकिफ डॉ. अंसारी ऐसी आवाजों के तनिक भी विचलित हुए बिना बड़े आराम से हल्के अंदाज में बोले...समझ लो मैंने टोपी पहन रखी है। उनके इस अंदाज से माहौल खुशनुमा हो गया और आवाजें भी बंद हो गईं। संबोधन के दौरान डॉ. अंसारी पुरानी यादों में भी चले गए। उन्होंने कहा कि इस हॉल की तारीकी में कुछ जाने पहचाने चेहरे चमक रहे हैं। डॉ. अंसारी ने कहा कि अलीगेरियन को अलीगढ़ आने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सर सैयद को सिर्फ सर सैयद डे या ऐसे ही आयोजनों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। सर सैयद ने एएमयू के रूप में आधुनिक शिक्षा का एक केंद्र स्थापित किया। उससे पहले साइंटिफिक सोसाइटी की स्थापना की। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब हम ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का किस तरह उपयोग करते हैं। अपने संबोधन के अंत में कहा कि अगर अफलाक के तारे तोड़ने हैं तो परवाज की ताकत पैदा करनी होगी। सिर्फ गुफ्तार काफी नहीं है। इकबाल के एक शेर का हवाला दिया कि -
‘गुफ्तार का गाजी बन तो गया
किरदार का गाजी बन न सका’
- इकबाल

आर्किटैक्ट अल वकील ने किया है डिजाइन
केए निजामी सेंटर फॉर कुरानिक स्टडी का डिजायन प्रख्यात आर्किटैक्ट लंदन के प्रो. अब्दुल वाहिद अल वकील ने तैयार किया है। 12 वर्षों में यह बनकर तैयार हुआ है। इसमें 2.5 करोड़ रुपये की लागत से शानदार मसजिद भी है, जिसके लिए निजी तौर पर धन की व्यवस्था की गई। इसके भवन के लिए यूजीसी ने अनुदान दिया है।

मौजूद हैं यह सुविधाएं
सेंटर में एक लैंग्वेज लैब, कांफ्रेंस रूम, वेबसाइट, सेमिंनार रूम, नेटवर्किंग एंड कम्यूनिकेशन, रिसर्च आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह पूरी तरह स्वायत्तशासी सेंटर है। यह आर्ट्स फैकल्टी या थियोलोजी विभाग से अलग है। सीधे एकेडमिक काउंसिल के प्रति उत्तरदायी है।

इनके नाम पर है यह सेंटर
प्रो. खालिक अहमद निजामी (1925-1997) ने 1947 में एएमयू ज्वाइन किया था। ख्याति प्राप्त विद्वानों में शामिल प्रो. निजामी यहां इतिहास विभाग के चेयरमैन रहे। सोशल वर्क एंड सोशल स्टडी संकाय के डीन रहे। बाद में एसएस हॉल के प्रवोस्ट, विवि के पीवीसी, वीसी भी रहे। उन्होंने 60 से अधिक किताबें लिखीं।

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