नहीं सुलझी मनाल की मौत की गुत्थी

Aligarh Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़/वाराणसी। बीएचयू से एमसीए कर रहे आईटीआई रोड के छात्र मनाल बंसल की मौत की गुत्थी दूसरे दिन भी नहीं सुलझ सकी। पुलिस न सिर्फ मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर तफ्तीश में जुटी है, बल्कि उसने एचजे भाभा हॉस्टल के उस कमरे की तलाशी भी ली जहां मनाल रहता था, लेकिन उसे कोई सुराग नहीं मिला। दूसरी ओर मनाल के परिजनों का आरोप है कि छात्रावास में शुक्रवार की सुबह एक छात्र ने रैगिंग की थी, उसके बाद वह डर गया था। आशंका है कि इसी के चलते उसने आत्महत्या कर ली हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण ट्रेन से कटना बताया गया है।
बन्नादेवी क्षेत्र के आईटीआई रोड रिसाल सिंह नगर निवासी मनाल बंसल की मौत की सूचना मिलने पर उसके पिता ज्ञानेश बंसल, मां आशा अग्रवाल, भाई गौरव बंसल, चाचा राकेश बंसल बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचेे। इस दौरान पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो पता चला कि मनाल के माता-पिता में 2004 में तलाक हो गया था। मनाल और उसका बड़ा भाई गौरव पिता के पास रहते थे, जबकि मां ने सिद्धगिरी बाग निवासी लक्ष्मण दास अग्रवाल से दूसरी शादी कर ली। पुलिस के अनुसार बीएचयू में एमसीए में दाखिला लेने के बाद मनाल मां आशा अग्रवाल के पास भी आने जाने लगा था। शुक्रवार की रात छात्रावास से बिना किसी को बताए वह सिद्धगिरी बाग चला गया था। मनाल की मां का कहना था कि वह कुछ परेशान था। सोमवार की रात लगभग आठ बजे उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया। इसके बाद वह बिना कुछ बताए घर से चला गया। सुबह उसकी मौत की सूचना मिली। पुलिस के मुताबिक इस घटना के पीछे पारिवारिक कलह भी कारण हो सकता है। इस बिंदु पर भी जांच चल रही है। इस बीच बुधवार की शाम हरिश्चंद्र घाट पर मनाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बयान
सोमवार की रात लगभग दस बजे मनाल ने फोन कर मुझसे कहा था कि भइया छात्रावास में एक छात्र ने कहा है कि जब भी आओ, झुककर सलाम करो। किसी से आंख मिलाकर बात मत करना। उसने मुझे छत पर ले जाकर चेतावनी देते हुए कहा कि नए-नए आए हो, ठीक से रहना। इससे मैं बहुत डर गया हूं। विश्वविद्यालय खुलेगा तो फिर वह धमकाएगा।
- गौरव बंसल, मनाल का भाई
छात्र के साथ यदि रैगिंग हुई तो उसे विश्वविद्यालय प्रशासन के किसी भी अधिकारी को फोन से यह जानकारी देनी चाहिए थी। छात्रावास में रैगिंग सेल के अधिकारियाें के फोन और मोबाइल नंबर बोर्ड पर अंकित हैं। यदि वह अधिकारियाें से शिकायत नहीं कर सकता था तो यूजीसी की रैगिंग सेल को ऑनलाइन शिकायत कर सकता था। इसमें पीड़ित छात्र का नाम भी गोपनीय रखा जाता है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ऐसे में यह रैगिंग का मामला नहीं लग रहा है।
- डा. विनय कुमार सिंह, छात्र अधिष्ठाता, बीएचयू

न खोजबीन की और न सूचना दी
एचजे भाभा छात्रावास में रात साढ़े नौ बजे छात्राें का प्रवेश बंद हो जाता है। इसके बाद वार्डेन या अन्य कर्मचारी यह देखते हैं कि कौन छात्र नहीं आया है। छुट्टी पर जाते समय प्रार्थना पत्र देना अनिवार्य है, लेकिन मनाल बंसल बिना बताए शुक्रवार की रात छात्रावास से चला गया था। इसके बाद भी छात्रावास के अधिकारियों ने तीन दिन तक उसकी खोजबीन नहीं की। न ही इसकी सूचना परिजनाें को दी। इन मुद्दों को लेकर बुधवार को पुलिस ने छात्रावास प्रशासन से पूछताछ भी की। इसे लेकर मनाल के पिता ज्ञानेश बंसल ने छात्रावास प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और उनका सीधे-सीधे कहना है कि यह घटना सिवाय रैगिंग के परिणाम के अलावा कुछ और नहीं है। वह रात में अचानक घर से निकलकर क्यों और कहां गया। इसके बाद उसका शव ट्रैक पर क्यों मिला। इसका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस को देना होगा। अगर पुलिस ने उनकी मदद नहीं की तो वे पुलिस व बीएचयू इंतजामिया के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

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