...वो संदीप मैं ही तो हूं

Aligarh Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। महानगर के धनीपुर इलाके के बहुचर्चित गेस्ट हाउस स्वामी ठा. संदीप सिंह हत्याकांड में पुनर्जन्म की कहानी से नया ट्विस्ट आ गया है। धनीपुर से करीब बारह किमी दूरी पर बसे गांव गुरशिखरन में पौने छह साल का अभिषेक पिछले तीन साल से खुद को वही संदीप बताकर अपने मां-बाप की परेशानी का सबब बना हुआ है। हालांकि खबर पाकर संदीप का परिवार भी अभिषेक से मिल आया और वह अभिषेक की बातों पर विश्वास करता है। मगर दोनों परिवारों की हैसियत में जमीन-आसमान का अंतर है। संदीप की हत्या से जुड़ी रंजिश के डर से अभिषेक का परिवार उसे उन पुरानी यादों से दूर रखे हुए हैं। ये बताता है पहचान : अपनी भांजी के विषय में, रायफल पर अपने हाथ से बांधे काले धागे के विषय में, गाड़ी के रंग, हत्या का समय, बच्चों, पंडित की पहचान, इस उम्र में बड़ों की तरह से बात करने का रुआब, मां, भाई, मामा के बेटे की पहचान, रायफल कॉक करना, मंडी के पास घर, गेस्ट हाउस बनवाना, दो लाख रुपये वापस करना, शरीर पर लगी गोलियों के निशान, नाले के सहारे घटना, घटना के वक्त एक साथी था, मगर वह भागा, दोनों पैदल थे, पिता का नाम न लेकर मास्टर साहब कहकर संबोधन आदि पहचान हैं, जिन्हें लेकर दोनों परिवार विश्वास कर रहे हैं।
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