अब भी ताजा है ‘करो या मरो’ की धुंधली याद

Aligarh Updated Thu, 09 Aug 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़। हलवाई खाने की पुरानी गली में रह रहे 82 वर्ष से ज्यादा के हो चले लक्ष्मी नारायण ठेकेदार को भारत छोड़ो आंदोलन की कुछ धुंधली सी याद है। अपनी याददाश्त पर जोर डालते हुए लक्ष्मी नारायण कहते हैं पुरानी बात हो चली है। उस समय कांग्रेस नेताओं पर नजर रखी जा रही थी। बड़े नेता भूमिगत हो गए थे। 8 अगस्त को बंबई में महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दे दिया और भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हो गई। अगले दिन 9 अगस्त को बड़ी गहमा-गहमी का माहौल था। लोग कह रहे थे कि गांधी जी गोरों को बाहर जाने के लिए कह रहे हैं। कई वर्षों के बाद परिपक्व होने पर भारत छोड़ो आंदोलन का राजनीतिक महत्व पता चला। उस समय रेलवे रोड पर कांग्रेस का ऑफिस हुआ करता था। जिले के तमाम स्वतंत्रता सेनानी यहां आते थे। उस समय इतना जरूर लगता था कि देश में बड़ा बदलाव आने वाला है। बाद में यह अंत: प्रवृत्ति सही भी साबित हुई देश को 5 साल बाद आजादी मिली।

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