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तब 50 पैसे का रोजा अब 200 रुपये का

Aligarh Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। बरकत वाला महीना रमजान शुरू होने वाला है। पवित्र माह में लोग सहरी, इफ्तार करेंगे और इबादत में मशगूल हो जाएंगे, लेकिन लोग पुराने जमाने को अब भी याद करते हैं। करीब 90 साल पहले जहां एक रोजे का खर्च 50 पैसे था, वहीं आज के दौर में 200 रुपये हो गया है। रमजान शुरू होने में महज दो दिन का वक्त है। महंगाई के इस दौर में रोजे का बजट बनाना मध्यमवर्गीय परिवार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दाल सब्जी और दुग्ध पदार्थों के आसमान छूते दाम आम रोजेदारों की कमर तोड़ने के लिए काफी हैं। 1926 से रोजे की शुरआत करने वाली अहमद नगर निवासी 98 साल की बुर्जुग शाहजहां बेगम कहती हैं कि उन दिनों एक रोजा 50 से 75 पैसे के खर्च में पूरा होता था। सहरी हो या इफ्तार, खाने पीने का शुद्ध समान मिलता था, लेकिन अब समय बदल गया है। शाहजहां बेगम की बहू महजबीं बेगम ने बताया कि दस साल की उम्र में पहला रोजा रखा था। बात तकरीबन 50 साल पुरानी है 5 से 10 रुपये में एक आदमी का रोजा आसानी से पूरा होता था। महजबीं की बेटी समरीन बोलीं कि अब 200 रुपये भी कम पड़ते हैं। हामिद विला में भी रमजान की तैयारियां हो रहीं हैं। घर की मुखिया शकीला बेगम कहतीं हैं कि 40 साल पहले जब उन्होंने रोजा शुरू किया तो खानपान का स्तर बहुत ही अच्छा था। अब ऐसा नहीं रहा। इनकी बहू सबा बोलीं कि गर्मी में रोजा 16 घंटे जबकि सर्दी में 12 घंटे का होता है, इसलिए ठंडी चीजों का इस्तेमाल ही बेहतर है।
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