गजेंद्र पर टीबी की मार, भुखमरी की कगार पर परिवार

Aligarh Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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अतरौली। 2 साल से टीबी का दंश झेल रहे गजेंद्र ने इलाज के लिए अपनी जमीन-जायदाद बेच दी लेकिन बीमारी ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। अब उसका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। पत्नी खुद मेहनत-मजदूरी कर चार बच्चों का पेट पाल रही है। अतरौली मुख्यालय से आठ किमी दूर स्थित गांव जिरौली धूमसिंह निवासी गजेंद्र (32) पुत्र गुलफाम खेतीबाड़ी कर अपना परिवार चलाता था। उसके चार बच्चे बंटी (7), निशा, कन्हैया और मोनू हैं। दो साल पहले उसे टीबी ने जकड़ लिया। उसने कई जगह इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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इलाज लिए गजेंद्र ने अपनी 5 बीघा जमीन और दो मवेशी भी बेच दिए। छह महीने पहले उसकी हालत और गंभीर हो गई। तब से वह चारपाई नहीं छोड़ पाया है। अब उसकी पत्नी मेहनत मजदूरी कर परिवार को पाल रही है। उसका परिवार भुखमरी की कगार पर है। हालात यह हैं कि रुपयों के अभाव में उसे रोजाना दवा भी नहीं मिल पाती।
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