धरती की बेचैनी नहीं मानव समझता है

Aligarh Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़। पर्यावरण दिवस की संध्या पर प्रशासनिक स्तर पर एक कार्यक्रम हो रहा था। पर्यावरण संरक्षण के लिए अच्छी-अच्छी और बड़ी बड़ी बातें हो रही थीं। तभी कार्यक्रम में आमंत्रित एक पर्यावरणविद् ने साधारण सा प्रश्न पूछा कि इस कार्यक्रम में कोल्ड ड्रिंक्स की जगह नीबू की शिकंजी क्यों नहीं रखी गई? इसी तरह प्लास्टिक और थर्माकोल के गिलास की जगह मिट्टी के कुल्हड़ क्यों नहीं हैं? जब प्रशासनिक स्तर पर यह स्थिति है तो आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है। साथ ही जागरूकता अभियानों की गंभीरता के लिए क्या कहा जा सकता है?।

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