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मौत के 7 साल बाद आया ‘1984’ का वारंट

Aligarh Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। ताउम्र लोगों की पंचर गाड़ियों को दुरुस्त करने वाले मो. रफीक की मौत के सात साल बाद दिल्ली पुलिस उनकी इज्जत को पंचर करने में लगी है। दिल्ली पुलिस ने नई बस्ती के रहने वाले मो. रफीक पुत्र शफी मोहम्मद की गिरफ्तारी को वारंट भेजा है। मंगलवार को आए इस वारंट में रफीक पर 1984 के सिख विरोधी दंगों में शामिल होने आरोप लगाया है, जबकि मो. रफीक अपनी जिंदगी में कभी दिल्ली ही नहीं गए। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह स्थिति मो. रफीक के आरोपी के हमनाम होने की वजह से आई। इस बीच परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। नई बस्ती निवासी टायर रिड्रेसिंग का काम करने वाले वली मोहम्मद ने बताया कि मंगलवार को स्थानीय पुलिस उनके पास दिल्ली पुलिस का वारंट लेकर आई थी, जिसमें उनके बड़े भाई मो. रफीक पुत्र शफी मोहम्मद का नाम था। इसके बाद पूरा परिवार असमंजस की स्थिति में पड़ गया। वली मोहम्मद ने बताया कि बड़े भाई रफीक 1950 से अपनी मृत्यु तक मैरिस रोड पर साइकिल में पंचर लगाने का काम करते रहे और पूरी जिंदगी में कभी दिल्ली नहीं गए।
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