शताब्दी में व्यापारी दंपति से छिनैती

Aligarh Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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अलीगढ़। अब तक ईएमयू और एक्सप्रेस ट्रेनों में लूटपाट और छिनैती करने वालों का पूरा गैंग अब शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेनों को अपना निशाना बना रहा है। रविवार को शताब्दी एक्सप्रेस में सवार होने से पहले आधा दर्जन मुसाफिरों के साथ धक्कामुक्की कर छिनैती की गई। जब मुसाफिर थाने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें डांट फटकार कर भगा दिया। मुसाफिरों का कहना था कि छिनैती और लूट करने वालों का पूरा गैंग स्टेशन पर पुलिस के संरक्षण में सक्रिय है। इस दौरान जीआरपी आगरा अनुभाग के एसपी की डांट फटकार के बाद छिनैती का एक मामला दर्ज किया गया है।
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रविवार सुबह शताब्दी एक्सप्रेस से आईटीआई रोड स्थित इंडस्ट्रियल स्टेट के मकान नंबर डी-24 निवासी कुलदीप गर्ग अपनी पत्नी मीना गर्ग के साथ लखनऊ जा रहे थे। डाईकास्टिंग का कारोबार करने वाले गर्ग दंपति लखनऊ में अपने एक परिजन के घर शोक व्यक्त करने जा रहे थे। उनके पीएनआर नंबर 2832511273 की टिकट पर सी-3 कोच में 48 और 49 नंबर सीट रिजर्व थी। तकरीबन बीस मिनट की देरी से पहुंची शताब्दी में चढ़ते वक्त ही बुरका पहने हुए एक महिला और एक युवक ने धक्कामुक्की शुरू कर दी। ट्रेन में चढ़ने के बाद सीट की ओर जाते वक्त जैसे ही दंपति ने स्लाइडिंग डोर खींचा तो बुरके वाली महिला ने दोबारा से धक्का देना शुरू कर दिया। दरवाजा खोल कर दंपति अंदर पहुंचे तो वह दोनों भी पीछे पीछे अंदर आ गए। धक्कामुक्की से परेशान गर्ग दंपति किनारे खड़े हो गए। इतने में ही बुरके वाली महिला और युवक यह कह कर उतरने लगे कि यह उनका कोच नहीं है। इस बीच मीनू गर्ग को लगा कि उनके कंधे पर टंगा हैंडबेग गायब हो गया है। बैग गायब होते ही मीनू की हालात बिगड़ गई और वह भी पति के साथ ट्रेन से उतर गई। मीनू ने बताया कि बैग में उनके लड्डू गोपाल भगवान, पेनकार्ड, तीन हजार कीमत का नोकिया का मोबाइल फोन था, जिसका नंबर 9412133581 है। इसके अलावा 15 हजार रुपये नकद, एसबीआई का एटीएम कार्ड और तीन ग्राम की सोने की अंगूठी थी। मीनू ने कहा कि उन्हें केवल भगवान की मूर्ति जाने का सबसे ज्यादा अफसोस है जो अब तक देश विदेश की यात्रा में हमेशा उनके साथ रही है। बाकी उन्हें किसी सामान की कोई फिक्र नहीं है। कुलदीप ने बताया कि घटना के बाद जब वह जीआरपी थाने पहुंचे तो उन्हें टरकाया गया, लेकिन एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई क्योंकि वरिष्ठ अधिकारी ने जीआरपी आगरा अनुभाग के एसपी को फोन कर पूरा मामला बताया था। इसके बाद ही उनकी रिपोर्ट दर्ज हो सकी है।
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