बिजली व्यवस्था का निजीकरण..महकमा विरोध में

Aligarh Updated Tue, 28 Jan 2014 05:44 AM IST
अलीगढ़। बिजली व्यवस्था प्राइवेट एजेंसियों को दिए जाने के मसले पर प्रदेश में सब कुछ शांत चल रहा था, लेकिन फिर से इस प्रक्रिया की शुरुआत ने पूरे महकमे को ही विरोध में खड़ा कर दिया। आगरा की बिजली व्यवस्था टोरंट को दिए जाने के अच्छे परिणाम नहीं रहे हैं। उधर दिल्ली की बिजली आपूर्ति प्राइवेट कंपनियों को दिए जाने के बाद इस मसले पर दिल्ली में एक पार्टी को जन्म मिला और सत्ता में आ गई। लगता है प्रदेश सरकार ने इस सबसे सबक नहीं लिया है। प्रदेश के मेरठ, कानपुर, गाजियाबाद और वाराणसी की बिजली व्यवस्था प्राइवेट एजेंसी को दिए जाने के लिए कंसलटेंट की नियुक्ति कर दी गई। यह सर्वे कर अपनी रिपोर्ट देंगे कि बिजली व्यवस्था प्राइवेट एजेंसी को दी जाए या नहीं। विद्युत अभियंता संघ के प्रांतीय महासचिव डीसी दीक्षित ने बताया कि इसके विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि आगरा की बिजली एक अप्रैल 2010 को टोरंट की गई और अब तक 1600 करोड़ का घाटा है। 28 मई 13 को संघर्ष समिति को सरकार की ओर से आश्वासन मिला था कि शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण नहीं होगा। समिति में सभी संगठन शामिल हैं। उनके साथ डीसी शर्मा, केसी पांडेय, जंट सिंह यादव, संजय गर्ग भी मौजूद थे। सभी नेताओं को इंजीनियर्स सहित सभी ने आश्वासन का वायदा किया।

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