यूपीएससी से पाली, अरबी फारसी हटाने पर विरोध शुरू

Aligarh Updated Wed, 22 Jan 2014 05:44 AM IST
अलीगढ़(ब्‍यूरो)। संघ लोक सेवा आयोग(यूपीएससी) से प्राचीन भाषा पाली, अरबी और फारसी को हटाए जाने का विरोध शुरू हो गया हैं। इस सिलसिले में मंगलवार को राज्य सभा में जदयू के मुख्य सचेतक एवं पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अली अनवर अंसारी अलीगढ़ पहुंचे। एएमयू के प्रबुद्ध लोगों को संबोधित किया। शमशाद मार्केट स्थित निशात अपार्टमेंट में आयोजित कार्यक्रम में सांसद अली अनवर अंसारी ने कहा कि पाली देश की प्राचीनतम भाषा है। जबकि फारसी और अरबी जानने वालों की संख्या देश में करीब 20 करोड़ है। फारसी विदेशी जुबान नहीं है। इसका जन्म अफगानिस्तान जो उस समय भारत का हिस्सा था, उसमें हुआ है। सैकड़ों साल फारसी को कोर्ट की जुबान रहने का गौरव हासिल है। कभी सभी सरकारी दस्तावेज इसी भाषा में रहते थे। इस अवसर पर प्रो. हुमायुं मुराद, डा. मनाजिर अली, डा. शकील समदानी, युसूफ भाई, प्रो. मतीन, मो. शाकिर, डा. मुजीब अंसारी, डा. शाह आलम, डा. तारिक, डा. अनवर आदि मौजूद थे।


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