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एक साल में 3.5 करोड़ की बाइकें पार

Aligarh Updated Mon, 11 Feb 2013 05:30 AM IST
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अब पुलिस के भरोसे न छोड़ें वाहन, जीपीएस ट्रैकर हो रहे जरूरी
हेडिंग
हर दिन दो वाहनों की चोरी का औसत है अपने जिले में
अपने जिले में हर साल बढ़ रही वाहन चोरी की संख्या
अफसरों की तमाम डांट-फटकार भी नहीं आ रही काम
--पुलिस नहीं ये लॉक लगाएं--
कार बाइक
सेंट्रल लॉक सेंट्रल लॉक
गियर लॉक व्हील लॉक
स्टेयरिंग लॉक बाइक मैन लॉक
व्हील लॉक जीपीएस ट्रैकर
जीपीएस ट्रैकर
--------------------------
--इन लॉक के फायदे--
सेंट्रल लॉक से एक सीमित दायरे में रहेगी वाहन पर नजर
गियर या व्हील लॉक को काटने में भी लगेगा काफी समय
जीपीएस ट्रैकर वाहन के स्टार्ट होते ही करेगा आपको अलर्ट
ट्रैकर के जरिए वाहन का पीछा कर पकड़े सकते हैं आप चोर
--ये है हाल --
जनपद वर्ष/चोरी गए वाहन वर्ष/चोरी गए वाहन वर्ष/चोरी गए वाहन
अलीगढ़ 2010/509 2011/672 2012/718
एटा 2010/120 2011/139 2012/198
हाथरस 2010/94 2011/122 2012/99
कासगंज 2010/37 2011/59 2012/77
(स्रोत:- पुलिस की मासिक मीटिंग के अनुसार)
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। महानगर में वाहन चोरी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। चोर आंख बचते ही बाइकों को चुरा रहे हैं। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो शहर में हर दिन दो बाइक चोरी का औसत निकल रहा है। एक साल में चोरी गई 50 हजार रुपये की बाइकों की कीमत पर गौर करें तो आंकड़ा साढ़े तीन करोड़ को पार कर रहा है। इसमें अगर चोरी हुई कार की संख्या को शामिल कर लिया जाए तो कीमत गई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि वाहन को पब्लिक प्लेस पर पुलिस के भरोसे छोड़ने के बजाय बाजार में मिलने वाले अच्छे लॉक या जीपीएस पर आधारित ट्रैकर से सुरक्षित कर दें। ट्रैकर वाहन के चलते ही अपने मोबाइल या ईमेल पर आपको अलर्ट करेगा और आप वाहन का पीछा कर चोर को पकड़ सकते हैं।
गियर लॉक और व्हील लॉक को चोर काटकर वाहन ले जा सकता है। हालांकि ये भी बेहद मुश्किल काम है। मगर ट्रैकर बेहद उपयोगी उत्पाद है। अगर आप पचास हजार की बाइक भी खरीद रहे हैं तो छह से सात हजार कीमत का ट्रैकर और एक हजार रुपये तक की कीमत का व्हील लॉक जरूर लगाएं। क्योंकि पुलिस ने खुद ही महानगर में जगह-जगह लोगों को व्हील लॉक के लिए जागरूक करने संबंधी बोर्ड लगवा रखे हैं। - मुन्ना बाबू, मोटर पार्ट्स एसेसरीज विक्रेता कार फिट

कौन पकड़े चोर..जब एफआर से चलता काम
पुलिस के आंकड़ों पर ही हम गौर करें तो बाइक चोरी के 80 फीसदी मुकदमों में खुद बाइक स्वामी प्रयास करके एफआर लगवा लेते हैं। इसके पीछे वजह है कि पुलिस को बाइक बरामद करने की फुरसत नहीं। मुकदमे में एफआर लगने पर उसकी कीमत इंश्योरेंस कंपनी से मिल जाती है। यही वजह है कि बाइक स्वामी वाहन चोरी होने पर रकम खर्च करके मुकदमा दर्ज कराता है। फिर सुविधा शुल्क देकर मुकदमे में एफआर लगवा देता है। ताजा मामला क्वारसी थाने का है, जहां मंगलवार रात स्वर्ण जयंती कालोनी से बाइक चोरी होने की तहरीर थाने में बुधवार को दी गई, जिस पर मुंशी ने 150 रुपये लेकर तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया। ऐसे ही एक मामले में दो माह पहले सेंटर प्वाइंट से बाइक चोरी हुई। बाइक स्वामी प्रकाश बाबू कहते हैं कि मुकदमे में एफआर लगवा ली है। पुलिस तो बाइक बरामद करने से रही। अब क्लेम मिल जाएगा।
यह सही है कि महानगर में वाहन चोरी सबसे ज्यादा है, जिसमें सिविल लाइन व क्वारसी वाहन चोरों के साफ्ट टारगेट पर हैं। हर मीटिंग में इन थानों के अधिकारियों के पेच कसे जाते हैं। रहा सवाल वाहन बरामद न होने का तो ऐसा नहीं है। हाल ही में पड़ोसी जनपदों में अपने जिले से चोरी गए वाहन बरामद हुए हैं। इस मसले पर आगे भी गंभीरता से निर्देश दिए जाएंगे। - प्रकाश डी डीआईजी

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