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उत्पीड़न से त्रस्त वनरक्षक ने खाया जहर

Aligarh Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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अलीगढ़। नुमाइश में ड्यूटी देकर डीएफओ से मिलने जमालपुर रेंज कार्यालय पहुंचे अधिकारियों से त्रस्त वन रक्षक ने शनिवार शाम जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की। उसके इस कदम से कार्यालय स्टाफ और अफसरों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और वे उसे मेडिकल कॉलेज छोड़कर भाग गए। जहां वह जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। वन रक्षक के परिजन इसके लिए क्षेत्रीय वन अधिकारी और डिप्टी वन अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया है।
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मूलत: बघेल नगर एटा चुंगी निवासी राकेश वर्मा (55) वन विभाग में वन रक्षक पद पर तैनात हैं। तीन बेटे और एक बेटी के पिता राकेश की तैनाती इन दिनों लोधा में है और हाल ही में उन्हें अकराबाद ट्रांसफर किया गया है। इन दिनों वह नुमाइश में लगे वन स्टाल पर ड्यूटी दे रहा है। साथी स्टाफ के अनुसार सुबह उसका डिप्टी वन अधिकारी राजीव खन्ना से नुमाइश में झगड़ा भी हुआ था। इसके बाद उसने डीएफओ से मिलने का समय लिया था। शाम चार बजे वे जमलापुर रेंज ऑफिस पहुंचे। वहां क्या हुआ, इस विषय में कोई कुछ नहीं बता पा रहा। मगर वहां राकेश ने सल्फास खा लिया। कुछ ही देर में हालत बिगड़ी तो कुछ अधिकारी और स्टाफ उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचा। खबर पर परिवार भी पहुंच गया। मगर मेडिकल कॉलेज में अधिकारी उन्हें छोड़कर चले गए, जबकि स्टाफ इधर-उधर बगलें झांकता दिखा। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के अनुसार हालत नाजुक है। अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। इस विषय में डिप्टी वन अफसर राजीव कृष्ण से बातचीत का प्रयास किया। मगर उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया।

चार माह से तंग था, क्या करता : राकेश
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भरती राकेश वर्मा ने उपचार के दौरान बताया कि चार माह से परेशान था। गलत काम के लिए डिप्टी राजीव खन्ना और क्षेत्रीय वन अधिकारी राजीव राय दबाव बनाते थे। न करने पर अब तक इगलास, लोधा, अकराबाद सहित चार तबादले कर दिए। तबादला रुकवाने के लिए कहा तो दो लाख रुपये रिश्वत के रूप में मांगे जाने लगे। एक माह का वेतन भी रोक लिया था। ऐसे में क्या करता, इसके सिवाय दूसरा कोई चारा न समझ में आया।
अफसरों ने खिलाया है उनको जहर
राकेश की पत्नी अनीता और बड़ा बेटा राजकुमार कहते हैं कि घर में वे अपने दो अधिकारियों राजीव राय व राजीव कृष्ण द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न की चर्चा करते थे। आज सुबह राजीव खन्ना से झगड़ा हुआ। अब दफ्तर में क्या हुआ, हमने देखा तो नहीं है, लेकिन हमारी समझ में इतना ही आ रहा है कि उनको बात न मानने पर अधिकारियों ने ही जहर खिलाया है। हम इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
- मैं कल से अवकाश पर हूं। अब मेरे पीछे क्या हुआ, मुझे कुछ नहीं मालूम। रहा सवाल राकेश या उनके परिजनों के आरोपों का तो कोई भी कुछ भी आरोप लगा सकता है। हां, इतना जरूर है कि उससे काम के लिए कहा गया था। उसने काम करने से मना किया। अब इसे वह उत्पीड़न की संज्ञा दे रहा है तो इसमें मेरा क्या दोष है।
- राजीव राय क्षेत्रीय वन अधिकारी
अस्पताल में किसने डाला था गलत बयान का जोर
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में जब राकेश को कुछ अधिकारी लेकर पहुंचे तो वहां किसी ने राकेश से इतना जरूर कहा कि वह कह दे कि उसने अपनी मर्जी से जहर खाया है। मगर उसी समय वहां मौजूद डॉक्टर ने अधिकारी को डपटते हुए कहा कि ऐसे कैसे कहलवाएंगे आप। यह पुलिस केस है। राकेश अपनी मर्जी से जो बयान देगा, वही माना जाएगा। अब वह अधिकारी कौन था और ऐसा क्यों कहलवाना चाह रहा था। कुछ ही देर में वह वहां से गायब हो गया।

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