आलोचना के बदले बढ़ रही निर्लज सराहना की प्रवृति

Aligarh Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
अलीगढ़। फेसबुक पर टिप्पणी करने वाली मुम्बई की दो युवतियां का उल्लेख करते हुए कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि आज के जमाने में आलोचना के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है। आलोचना करने वाले को जेल मिलती है। समाज में निर्लज सराहना की प्रवृति बढ़ रही है। वे रविवार को एएमयू के एनआरएससी क्लब में आयोजित ‘प्रो. कुंवरपाल सिंह स्मृति व्याख्यान’ को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। केपी सिंह मेमोरियल चेरीटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में ‘नवजागरण : परम्पराएं और संभावनाएं’ विषयक व्याख्यान में प्रो. शंभुनाथ ने यूरोप और भारत के नवजागरण पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि भारत का नवजागरण बहुरंगात्मक व यूरोप से भिन्न है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फार्म हाउस में पैदा हुए विद्वानों की दिलचस्पी अतीत को जानने में नहीं है। आज इतिहास को दो रूपों में उपयोग हो रहा है। पहला, इतिहास अब वैश्वीकरण की दृष्टि से मनोरंजन स्थल है। दूसरा, इतिहास को शस्त्रागार के रूप में बदला जा रहा है ताकि सामुदायिक विभाजन हो सके। ये विद्वान आज अतीत में राजनीतिक लालच से जाते है। उन्होंने कहा कि भावना शुन्य और आकड़ेबाज आलोचना ठीक नहीं है। ज्ञान धारा के विकास के साथ भाव धारा का भी विकास होना चाहिए। प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि नवजागरण अभी भी असमाप्त परियोजना है। ऐसे में प्रो. केपी सिंह जैसे लोगों की जरूरत है। इसे पूरा करने का दायित्व दलित, स्त्री, किसान, कलाकार और बुद्धिजीवि पर है। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. प्रदीप सक्सेना ने भारतीय नवजागरण की ओर इंगित करते हुए कहा कि जब आप तकनीकी रूप से पिछड़े है तो एडवांस तकनीक वालों पर कैसे हावी हो जाएंगे। पूरे नवजागरण को तटस्थ भाव से देखने की जरूरत है। डा. नमिता सिंह ने कहा कि हम इतिहास का विश्लेषण वर्तमान को समझने के लिए करते है और वर्तमान का विश्लेषण कर भविष्य की दिशा तय करते है। संचालन राजीव लोचन नाथ शुक्ल तथा धन्यवाद ज्ञापित सुमिता सिंह ने किया। डा. अजय बिसारिया, डा. वेद प्रकाश अमिताभ आदि थे।

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