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महिलाओं ने योगी का काफिला रोकने की कोशिश की

Updated Mon, 05 Jun 2017 08:31 PM IST
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महिलाओं ने की योगी का काफिला रोकने की कोशिश
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

पुलिस की उदासीनता से आक्रोशित अलग-अलग घटनाओं के पीड़ितों ने सोमवार को अलीगढ़ आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफिले को रोकने की कोशिश की। मथुरा रोड स्थित एटूजेड प्लांट पर हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर महिलाओं ने मुख्यमंत्री की गाड़ी को रोकना चाहा, लेकिन जब वह ऐसा नहीं कर सकीं तो महिलाएं सिकंदराराऊ के विधायक की गाड़ी के आगे ही लेट गईं। किसी तरह पुलिस ने गाड़ी को वहां से निकलवाया। इसी तरह कृष्णांजलि नाट्यशाला के बाहर भी हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर पीड़ित परिवार की महिला ने मुख्यमंत्री के काफिले के आगे लेट गई। सुरक्षा कर्मियों ने महिला को हटाया, जिसके बाद काफिला आगे बढ़ गया। इसके बाद पीड़ितों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और नेताओं से खूब गुहार की, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी।


ए टू जेड प्लांट का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला जैसे ही प्लांट के गेट से बाहर निकला और बाईपास की ओर जाने के लिए मुड़ा तभी, सासनी गेट के मोहल्ला सराय गढ़ी निवासी शांति देवी, पुष्पा और सुमन मुख्यमंत्री के काफिले के आगे आ गईं। सुमन के पति दिनेश की अप्रैल में हत्या की गई थी, जिसका मुकदमा थाना सासनी गेट में दर्ज है। इसी मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर मृतक दिनेश की मां शांति देवी, भाभी पुष्पा और पत्नी सुमन ने सीएम का काफिला रोकने का प्रयास किया।


इस पर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तीनों महिलाओं को काफिले के आगे से खींच लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री की गाड़ी और उनका एस्कॉर्ट व पायलट तो बाईपास की ओर चले गए, लेकिन पीछे सिकंदराराऊ के विधायक वीरेंद्र सिंह राणा की गाड़ी रह गई। तीनों महिलाएं विधायक वीरेंद्र सिंह राणा की गाड़ी के आगे लेट गईं। यह देख कर प्रशासन के हाथ पैर फूल गए, सुरक्षा कर्मियों ने किसी तरह महिलाओं को गाड़ी से सामने से हटाया और गाड़ी को आगे बढ़ाया।

बाद में मृतक के भाई कैलाश ने बताया 5 अप्रैल को उसने अपने भाई की हत्या का मामला दर्ज कराया था, लेकिन इसके बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि आईजी से लेकर स्थानीय पुलिस अधिकारियों तक गुहार की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

इसके बाद जब मुख्यमंत्री कृष्णांजलि नाट्यशाला पहुंचे तो वहां भी कुछ ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई। कृष्णांजलि नाट्यशाला से जब मुख्यमंत्री नुमाइश गेस्ट हाउस की ओर रवाना हुए तो कश्मीरी मार्केट के पास गांधीपार्क डोरी नगर की कमलेश ने काफिला रोकने की कोशिश की। कमलेश के 11 वर्षीय बेटे की हत्या कर दी गई है। जैसे ही कमलेश मुख्यमंत्री के काफिले के पायलट के सामने आयी तभी वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उसे एक ओर खींच लिया। इसके बाद काफिला गुजर गया। बाद में कमलेश ने बताया कि 24 जुलाई 2015 उसका बेटा लापता हो गया था। वह अनूपशहर बहेरिया के एक आश्रम में पढ़ता था। बाद में उसका शव मिला। इस मामले में नामजद आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।

सीएम का काफिला जाने के बाद कमलेश ने अपनी फरियाद वहां पर मौजूद नेता, अधिकारियों और सभी बड़े लोगों से की, लेकिन किसी ने भी उसकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया। भीषण गर्मी में कमलेश अपनी फरियाद लेकर भटकती रही। इस तरह सीएम के काफिले को फरियादियों के प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ा।

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